मड़ियाहूँ (सलारपुर)।
मड़ियाहूँ क्षेत्र के ग्राम सलारपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन श्रद्धा, भक्ति और भावपूर्ण वातावरण के बीच व्यासपीठ पूजन एवं व्यास आचार्य की विदाई के साथ सम्पन्न हुआ। सात दिवसीय कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।
कथा समापन दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण की महिमा और धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के गूढ़ रहस्यों का विस्तार से वर्णन किया गया। व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए संत कौशल किशोर ठाकुर महाराज ने कहा कि “धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — ये चार पुरुषार्थ मनुष्य जीवन के आधार हैं। श्रीमद्भागवत कथा हमें अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा देती है।”
उन्होंने कहा कि भगवान प्रत्येक युग में अवतार लेकर जीवों को धर्म पालन और कर्म करने का संदेश देते हैं। इस संसार में हर व्यक्ति को अपना कर्म और कर्तव्य निभाकर अंततः अपने वास्तविक धाम — ईश्वर के चरणों में ही लौटना होता है। उन्होंने मृत्यु को जीवन की सच्ची मुक्ति बताते हुए कहा कि महावीर, बुद्ध और संतों ने मृत्यु को मित्र के समान स्वीकार किया, क्योंकि यह आत्मा को परमात्मा से मिलाती है।
कथा के दौरान श्री सुखदेव जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्ति का प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। संत कौशल किशोर ठाकुर ने कहा कि मनुष्य की पूर्णता तभी है जब वह ईश्वर द्वारा दिए गए दायित्वों को पूरी निष्ठा और कर्तव्य भाव से निभाए।
समापन अवसर पर मुख्य यजमान नौहर सिंह एवं ठाकुर दुखहरण सिंह के परिजनों ने कथा व्यास संत कौशल किशोर ठाकुर महाराज का तिलक कर अंगवस्त्र भेंट कर ससम्मान विदाई दी।
इस अवसर पर अमित सिंह श्रीनेत हवेली से, ठाकुर अमर बहादुर सिंह, अरुण सिंह सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। सभी ने संत कौशल किशोर ठाकुर द्वारा सलारपुर गांव में भक्ति रूपी वृंदावन जैसा पावन वातावरण निर्मित करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
गांव के लोगों ने कहा कि इस आयोजन ने सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा दी है। कथा के माध्यम से जहां धर्म और संस्कारों का संदेश मिला, वहीं युवाओं को भी जीवन के उद्देश्य और कर्तव्य का बोध हुआ।

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