लखनऊ| उत्तर प्रदेश में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक और मामला सामने आया है। राजधानी लखनऊ स्थित लोक निर्माण विभाग के विद्युत एवं यांत्रिक खंड में लंबे समय से खड़ी और कंडम हो चुकी एक सरकारी कार को कागजों में चालू दिखाकर उसके नाम पर तेल खर्च दर्शाए जाने की शिकायत पर विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। प्राथमिक जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद अवर अभियंता (जेई) अनिल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की गई है।
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग के विद्युत एवं यांत्रिक खंड, 17वें सर्किल, लखनऊ में एक चारपहिया वाहन काफी समय से परिसर में खड़ा था और तकनीकी रूप से कंडम की श्रेणी में पहुंच चुका था। इसके बावजूद अभिलेखों में इस वाहन को उपयोग में दर्शाया जाता रहा। सूत्रों के मुताबिक वाहन को टोचन कार्य में लगाए जाने का उल्लेख करते हुए नियमित रूप से ईंधन व्यय का भुगतान भी किया जाता रहा।
मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचने पर प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि वाहन वास्तव में संचालन योग्य नहीं था, फिर भी उसके नाम पर खर्च दिखाया गया। इसे वित्तीय अनियमितता और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के रूप में देखा गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अवर अभियंता अनिल कुमार का निलंबन आदेश जारी कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें मुख्यालय से संबद्ध रखा गया है। वहीं सहायक अभियंता एसके नायक के विरुद्ध कर्मचारी आचरण नियमावली के नियम-7 के तहत और अधिशासी अभियंता रंजिता प्रसाद के खिलाफ नियमावली-10(2) के अंतर्गत विभागीय जांच बैठा दी गई है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शासन स्तर से भी स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सरकारी धन और संसाधनों के दुरुपयोग पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।



