गाजियाबाद। शहर की एक आवासीय सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए परिवार की आर्थिक स्थिति की पड़ताल शुरू कर दी है। पिता के विरोधाभासी बयानों के बाद पुलिस ने उसके और पत्नियों के बैंक खातों की विस्तृत जानकारी जुटाई, जिसमें कुल छह खाते सामने आए हैं।
पुलिस जांच में पता चला कि तीन बैंक खाते पिता के नाम, दो खाते दूसरी पत्नी के नाम और एक खाता तीसरी पत्नी के नाम पर है। इनमें से दो खाते बंद मिले, जबकि एक डीमैट खाता चालू अवस्था में है। इस डीमैट खाते में न्यूनतम 30 हजार रुपये रखना अनिवार्य है और फिलहाल इसमें करीब 37 हजार रुपये मौजूद हैं। वहीं तीसरी पत्नी के बैंक खाते में मात्र 39 पैसे शेष पाए गए। अन्य खाते निष्क्रिय या बंद हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2007 के आसपास पिता के खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ करता था। वह प्रॉपर्टी डीलिंग और वाहनों की खरीद-फरोख्त के कारोबार से जुड़ा था। वर्तमान में वह एक ब्रोकर के माध्यम से शेयर ट्रेडिंग कर रहा था। पुलिस का कहना है कि डीमैट खाते से कुछ समय पहले तक बड़ी रकम का ट्रांजैक्शन हुआ था, जिसकी भी जांच की जा रही है।
यह भी सामने आया है कि वर्ष 2016 से अब तक उसने क्रेडिट कार्ड और विभिन्न बैंकों से लगभग 10 अलग-अलग ऋण लिए थे। अधिकांश ऋण 2 से 3 लाख रुपये की राशि के थे। परिजनों के अनुसार वह घर खर्च चलाने के लिए अपने भाई से आर्थिक सहायता लेता था और रिश्तेदारों व परिचितों से उधार मांगना उसकी मजबूरी बन गया था।
पुलिस आर्थिक स्थिति, कर्ज और पारिवारिक तनाव के बीच किसी संभावित संबंध की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ गयी है।

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