जमानत मामलों की सुनवाई से खुद को किया अलग
प्रयागराज| इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया कठोर टिप्पणियों से आहत होकर जमानत याचिकाओं की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि भविष्य में उन्हें जमानत संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए नामित न किया जाए।
मामला दहेज हत्या से जुड़े एक जमानत आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से संबंधित है। जानकारी के अनुसार, अभियुक्त राकेश तिवारी की दूसरी जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भाटिया ने 9 फरवरी 2026 को चेतराम वर्मा प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों का संज्ञान लिया।
बताया गया है कि उनके द्वारा पूर्व में पारित एक जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति भाटिया ने कहा कि किसी भी न्यायाधीश के आदेश का उच्चतर अदालत द्वारा निरस्तीकरण असामान्य नहीं है, क्योंकि न्यायिक व्यवस्था में अपीलीय प्रक्रिया स्वाभाविक है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित मामले में की गई टिप्पणियां “निराशाजनक” और “मनोबल गिराने वाली” थीं। उनका कहना था कि ऐसी टिप्पणियां न्यायिक कार्य के दौरान मानसिक दबाव उत्पन्न कर सकती हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम न्यायिक गरिमा और संस्थागत संवाद से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। सामान्यतः उच्चतर अदालतें अधीनस्थ या समकक्ष न्यायालयों के आदेशों की समीक्षा करते समय विधिक त्रुटियों पर टिप्पणी करती हैं, किंतु व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचने की परंपरा भी रही है।
इस घटनाक्रम के बाद अब यह देखना होगा कि मुख्य न्यायाधीश द्वारा जमानत मामलों के आवंटन को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल, जस्टिस भाटिया ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जमानत याचिकाओं की सुनवाई से स्वयं को अलग रखेंगे।






