लखनऊ| समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शंकराचार्य पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर भाजपा सरकार और उसके विधायकों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में अपमानजनक और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग करना केवल एक व्यक्ति विशेष का अपमान नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन परंपरा और आस्था का अपमान है। उन्होंने इसे “शाब्दिक हिंसा” बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्य पाप की श्रेणी में आते हैं।
अखिलेश यादव ने लिखा कि जो लोग ऐसी टिप्पणियों पर मेजें थपथपाकर या चुप रहकर समर्थन देते हैं, वे भी समान रूप से दोषी हैं। उन्होंने कहा कि जब भाजपा के विधायक सदन से बाहर निकलकर जनता के बीच जाएंगे तो उन्हें जनता के सवालों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यदि जनता आक्रोशित हुई तो “सड़क पर ही उनका सदन लगा देगी।”
सपा प्रमुख ने महाकुंभ से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में हुई मौतों के सही आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। मुआवज़े के नाम पर नकद वितरण में भी भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए उन्होंने सवाल किया कि जिन पीड़ित परिवारों तक मुआवज़ा नहीं पहुंचा, उनके हिस्से का पैसा आखिर कहां गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग अपने ऊपर दर्ज मुकदमों को हटवाने में सक्रिय रहते हैं, लेकिन जवाबदेही से बचते हैं।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में व्यंग्य करते हुए कहा कि जब किसी नेता के मुंह से ‘कानून का शासन’ जैसे शब्द निकलते हैं और बाद में शब्दों की शुद्धता पर सवाल उठते हैं, तो क्या उसके लिए दोबारा सदन बुलाया जाएगा या फिर प्रायश्चित का नाटक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सब राजनीतिक दिखावा है और जनता अब इन बातों को समझ चुकी है।
उन्होंने आगे कहा कि जब इंसान की जगह उसका अहंकार बोलता है तो वही स्थिति पैदा होती है जिसमें संस्कार विकार में बदल जाते हैं। समाज में वही व्यक्ति सम्मान खो देता है जिसके बारे में यह कहावत प्रचलित हो जाती है—“जब मुंह खोला, तब बुरा बोला।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिस समाज के खिलाफ नफरत की राजनीति की गई, उसी समाज को धर्म के नाम पर अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि मौका मिले तो विवादित फिल्मों को भी बिना नाम बदले रिलीज कराकर टैक्स फ्री करने जैसी राजनीति की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में संबंधित समाज एक-एक वोट के माध्यम से जवाब देगा और सत्ता परिवर्तन संभव है।
अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य पर दिया गया अभद्र बयान सदन की कार्यवाही में स्थायी रूप से दर्ज हो चुका है और यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने इसे कड़े शब्दों में निंदनीय बताते हुए कहा कि इस प्रकार की भाषा और आचरण लोकतंत्र और धार्मिक परंपराओं दोनों के लिए घातक हैं।






