थाईलैंड|बढ़ती जंगली हाथियों की आबादी और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए वन्यजीव अधिकारियों ने हाथियों को जन्म नियंत्रण वैक्सीन देना शुरू किया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिक आवास सिकुड़ने के कारण हाथी अक्सर खेती वाली जमीनों और रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जंगली हाथियों से जुड़े हमलों में 30 लोगों की मौत हुई और 29 अन्य घायल हुए। कई किसानों की फसलें भी बर्बाद हुईं, जिससे ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आबादी पर नियंत्रण नहीं किया गया तो ऐसे संघर्ष और बढ़ सकते हैं।
सरकार की ओर से शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के तहत 25 वैक्सीन की खुराकों के साथ दो वर्ष का परीक्षण किया गया। इस दौरान पाया गया कि वैक्सीन के प्रभाव से मादा हाथियों के अंडाणु निषेचित नहीं हो सके, जिससे प्रजनन दर में कमी आई। अधिकारियों का दावा है कि यह तरीका हाथियों को नुकसान पहुंचाए बिना आबादी नियंत्रित करने का अपेक्षाकृत सुरक्षित उपाय है।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि वैक्सीन हार्मोनल संतुलन को प्रभावित किए बिना प्रजनन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकती है। इससे हाथियों के व्यवहार में कोई आक्रामक बदलाव नहीं देखा गया, जो संरक्षण प्रयासों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि कुछ पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल जन्म नियंत्रण ही स्थायी समाधान नहीं है। वे जंगलों और प्राकृतिक गलियारों के संरक्षण, भूमि उपयोग की बेहतर योजना और स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय को भी उतना ही जरूरी बताते हैं।
सरकार का कहना है कि परीक्षण के नतीजों का व्यापक विश्लेषण किया जाएगा और यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। अधिकारियों का उद्देश्य मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जंगली हाथियों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है।


