ढाका।
बांग्लादेश के हालिया संसदीय चुनावों में तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 299 में से 212 सीटों पर कब्जा जमाकर BNP ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी को 77 सीटें मिलीं। इस भारी जनादेश के साथ ही BNP ने अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक मांग को फिर दोहराया है—पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत से प्रत्यर्पण।
चुनावी नतीजों के तुरंत बाद BNP की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि उनकी पार्टी औपचारिक रूप से भारत सरकार से हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने का अनुरोध करेगी। उनका कहना है कि हसीना को बांग्लादेश की अदालतों में चल रहे मामलों का सामना करना चाहिए और यह प्रक्रिया द्विपक्षीय संधि तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी की जानी चाहिए।
BNP का तर्क है कि कानून सबके लिए समान है और पूर्व प्रधानमंत्री होने के बावजूद शेख हसीना को न्यायिक प्रक्रिया से छूट नहीं मिलनी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे भारत समेत सभी देशों के साथ आपसी सम्मान और बराबरी पर आधारित संबंध चाहते हैं, लेकिन साथ ही वे यह भी मानते हैं कि न्यायिक मामलों में सहयोग आवश्यक है।
दूसरी ओर, शेख हसीना पहले ही बांग्लादेश में हुए चुनावों को “दिखावा” करार दे चुकी हैं और उन्हें रद्द करने की मांग कर चुकी हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। हसीना 2024 में छात्र आंदोलन के बाद 5 अगस्त को ढाका छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं।
भारत सरकार ने इस मामले पर पहले ही स्पष्ट किया है कि उसे प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध प्राप्त हुआ है और इसे कानूनी व न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत परखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत बांग्लादेश के लोगों के हित, शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है तथा सभी पक्षों से रचनात्मक संवाद जारी रहेगा।
ढाका की ओर से नई दिल्ली को द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। हालांकि किसी भी प्रत्यर्पण प्रक्रिया में दोनों देशों के कानून, न्यायिक समीक्षा और कूटनीतिक विचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पूरी तरह कानूनी परीक्षण और राजनयिक संतुलन पर निर्भर करेगा।
बांग्लादेश की एक विशेष अदालत द्वारा शेख हसीना को अनुपस्थिति में दोषी ठहराए जाने और 2024 की राजनीतिक हिंसा से जुड़े आरोपों में सजा सुनाए जाने की खबरों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। BNP की चुनावी जीत के बाद यह मामला अब नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रत्यर्पण का मुद्दा भारत–बांग्लादेश संबंधों में एक अहम कूटनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं, ऐसे में किसी भी निर्णय का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल सबकी नजरें नई ढाका सरकार और नई दिल्ली की आगामी कूटनीतिक पहल पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि कानूनी प्रक्रिया, राजनीतिक इच्छाशक्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के संतुलन के बीच यह संवेदनशील मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।


