मैनपुरी: परिवार परामर्श केंद्र (Family Counseling Center) ने एक बार फिर वैवाहिक जीवन (married life) में आई दरार को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 13 फरवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा के निर्देशन में आयोजित सत्र में कुल 21 पत्रावलियों पर सुनवाई की गई, जिनमें से एक दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाते हुए उन्हें पुनः साथ रहने के लिए राजी कर लिया गया।
यह मामला थाना बेवर क्षेत्र के ग्राम अटलकड़ा निवासी करिश्मा और उनके पति अमरदीप उर्फ अंशू, निवासी ग्राम शीलबंत से जुड़ा था। करिश्मा ने वैवाहिक मतभेद और पारिवारिक कलह को लेकर परिवार परामर्श केंद्र में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। वर्ष 2025 में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह के बाद दोनों के बीच आपसी मतभेद बढ़ गए थे, जिसके चलते मामला पुलिस तक पहुंचा और बाद में परिवार परामर्श केंद्र को सौंपा गया।
परामर्श केंद्र की टीम ने संवेदनशीलता के साथ दोनों पक्षों को अलग-अलग तिथियों पर बुलाकर करीब 12 चरणों में गहन काउंसलिंग की। प्रत्येक बैठक में संवाद और विश्वास को प्राथमिकता दी गई। काउंसलरों ने पति-पत्नी को रिश्ते की सकारात्मक बातों को याद दिलाया और आपसी संवाद की कमी को दूर करने पर जोर दिया।
लगातार प्रयासों और धैर्यपूर्ण समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने अपनी गलतफहमियों को दूर करते हुए साथ रहने का निर्णय लिया। समझौते के बाद दंपति को शुभकामनाओं के साथ विदा किया गया। इस अवसर पर प्रभारी परिवार परामर्श केंद्र हेमलता सिंह, काउंसलर रामकिशन यादव, मुजम्मिल मिर्जा, महिला हेड कांस्टेबल कुसुम तथा हेड कांस्टेबल कल्याण मौजूद रहे।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में संचालित परिवार परामर्श केंद्र समाज में पारिवारिक स्थिरता और सामंजस्य स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्राथमिकता परिवार को टूटने से बचाना और आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालना होता है। केंद्र में आने वाले अधिकांश मामलों में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, जिससे परिवारों को नई शुरुआत का अवसर मिल रहा है।


