बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष के आचरण को मुख्यमंत्री ने बताया सनातन परंपरा के विपरीत
लखनऊ: विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Governor Anandiben Patel) के अभिभाषण के समय हुए हंगामे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी दल का व्यवहार न केवल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख का अपमान है, बल्कि मातृ शक्ति के सम्मान के भी विपरीत है।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था और दलीय बैठकों में इसकी जानकारी दी जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि यह कहना उचित नहीं कि कार्यक्रम अचानक थोपा गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का नाम लेते हुए कहा कि वे वरिष्ठ और वयोवृद्ध सदस्य हैं, इसलिए उनकी बातों का बुरा नहीं माना जाता, लेकिन सदन में उनका आचरण उचित नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि यदि कोई स्वयं को सनातन परंपरा का मानने वाला बताता है, तो उसके आचरण में भी वह सम्मान और मर्यादा दिखनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में सनातन धर्म की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में मां या मां के समान आयु वाली महिला को सर्वोच्च सम्मान देने का विधान है।
उन्होंने महर्षि वेदव्यास का उल्लेख करते हुए श्लोक उद्धृत किया—
“नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः।
नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन परंपरा में मां के समान कोई छाया, सहारा, रक्षक या प्रिय नहीं है। इसलिए किसी भी महिला, विशेषकर संवैधानिक पद पर आसीन राज्यपाल के प्रति असम्मानजनक व्यवहार परंपरा और मर्यादा के विरुद्ध है।
राजनीतिक माहौल गरम
बजट सत्र के दौरान हुए इस घटनाक्रम के बाद सदन का माहौल गरम रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।


