लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में बेरोजगारी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश का युवा “खून के आंसू रो रहा है।” उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में देरी के कारण युवाओं की जिंदगी के तीन-तीन साल बर्बाद हो रहे हैं।
डॉ. सोनकर ने आरोप लगाया कि आयोगों द्वारा जारी रिक्तियों में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, जिससे अभ्यर्थियों को भ्रमित होना पड़ता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदेश में कुल कितने पद खाली हैं और उन्हें भरने की समय-सीमा क्या है।
इस पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सभी भर्तियों का वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाता है और वर्ष 2026 का कैलेंडर पहले ही प्रकाशित किया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 के बाद अब तक 47 हजार पदों पर नियुक्तियां की गई हैं और आरक्षण नियमों का पूरी तरह पालन हुआ है।
वित्त मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। हालात ऐसे बने कि विधानसभा अध्यक्ष को कुछ देर के लिए अपनी कुर्सी छोड़कर उठना पड़ा।
बजट सत्र की शुरुआत से पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस के मनरेगा बचाओ अभियान पर निशाना साधते हुए उसे “खोखला अभियान” करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं से गांवों में वास्तविक विकास हुआ है, जबकि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहा है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सदन में छिड़ी यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार

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