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Friday, February 13, 2026

माफिया के दोनो भाई सहित 11 गैंगस्टर एक्ट में नामजद, न्यायालय की अनुमति के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

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– बब्बन, डब्बन सहित आधा दर्जन गिरफ्तार,
फर्रुखाबाद।जनपद में कुख्यात माफिया अनुपम दुबे और उसके गैंग के खिलाफ प्रशासन ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया है। जिला प्रशासन से विधिवत अनुमति मिलने के बाद थाना स्तर पर एनसीआरबी प्रारूप में विस्तृत गैंगचार्ट तैयार कर अभियोग पंजीकृत किया गया।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार गैंग के सरगना के रूप में अनुपम दुबे को चिन्हित किया गया है। उसके साथ अनुराग कुमार उर्फ अनुराग दुबे उर्फ डब्बन, विनीत दुबे उर्फ बीनू, विजय विक्रम, आशुतोष द्विवेदी उर्फ बबी, आदेश सिंह, आशीष पांडेय, धर्मेन्द्र चतुर्वेदी उर्फ पप्पू चौबे, अमित कुमार उर्फ अमित दुबे उर्फ बब्बन, प्रवीण कटियार तथा महेन्द्र कटियार को गैंग का सक्रिय सदस्य दर्शाया गया है।
एफआईआर के प्रथम सूचना तथ्य में उल्लेख है कि गैंग के सदस्य अवैध धनार्जन, भयादोहन, अपहरण कर फिरौती मांगने, जान से मारने की धमकी देने, धोखाधड़ी कर फर्जी बैनामा तैयार कर जमीनों पर कब्जा करने जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त रहे हैं। आरोप है कि इनकी गतिविधियों से क्षेत्र में भय और आतंक का वातावरण व्याप्त रहा, जिसके कारण आमजन इनके विरुद्ध खुलकर गवाही देने से कतराते रहे।
दस्तावेजों के अनुसार अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास गैंगचार्ट में दर्ज किया गया है और तथ्यों के सत्यापन के उपरांत जिलाधिकारी से अनुमोदन प्राप्त किया गया। इसके बाद धारा 3(1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बीती रात ताबड़तोड़ दबिश देकर गैंग से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि शेष की तलाश में टीमें सक्रिय हैं। पुलिस का कहना है कि गैंग की आर्थिक जड़ों पर भी प्रहार किया जाएगा और अवैध संपत्तियों की पहचान कर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला प्रशासन की अनुमति के बाद गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज होना इस बात का संकेत है कि शासन स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएंगे और किसी भी प्रकार का राजनीतिक या सामाजिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर यह कार्रवाई “जीरो टॉलरेंस” नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के रूप में देखी जा रही है। पुलिस का दावा है कि गैंग के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की गई है और आगे भी जांच जारी रहेगी।
फिलहाल पूरे जनपद में इस बड़ी कार्रवाई की चर्चा है। आने वाले दिनों में गैंग की संपत्तियों की कुर्की, बैंक खातों की जांच और सहयोगियों के खिलाफ अतिरिक्त मुकदमों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है—अपराध और अपराधियों के लिए जिले में कोई स्थान नहीं।

अंडरग्राउंड वर्कर्स पर भी नजर
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब कार्रवाई केवल नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी। जांच एजेंसियों ने उन तथाकथित “अंडरग्राउंड वर्कर्स” की भी पहचान शुरू कर दी है, जो सीधे सामने न आकर परदे के पीछे से वसूली और दबाव बनाने का काम करते थे। बताया जा रहा है कि ये लोग व्यापारियों, ठेकेदारों और जमीन संबंधी मामलों में दबंगई दिखाकर गैंग के लिए रकम इकट्ठा करते थे।
एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों को ऐसे व्यक्तियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन, जमीन रजिस्ट्रियों और आपसी संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आर्थिक जड़ों पर प्रहार की तैयारी
गैंग की कथित अवैध संपत्तियों की पहचान कर जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। राजस्व और पुलिस विभाग मिलकर ऐसे भूखंडों और संपत्तियों का सत्यापन कर रहे हैं, जिन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे का आरोप है। प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त कर गैंग की आर्थिक कमर तोड़ी जाएगी।
धारा 3(1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत दर्ज इस मुकदमे को जिले में “जीरो टॉलरेंस” नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की गई है और आगे की जांच में यदि नए नाम सामने आते हैं तो उन्हें भी गैंगस्टर की कार्रवाई में शामिल किया जाएगा।
फिलहाल जनपद में इस सख्त कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि चाहे प्रत्यक्ष रूप से गैंग में शामिल हों या परदे के पीछे रहकर वसूली का नेटवर्क चलाते हों—कानून की पकड़ से कोई नहीं बचेगा।

सोशल मीडिया गतिविधियों की भी निगरानी
जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी निगरानी तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अकाउंट्स और पेज चिन्हित किए जा रहे हैं जो आपराधिक गतिविधियों में आरोपित व्यक्तियों का महिमामंडन कर रहे हैं या भ्रामक/उत्तेजक सामग्री के जरिए कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाएगा, लेकिन यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर हिंसा के लिए उकसाता है, झूठी जानकारी फैलाता है या कानून-व्यवस्था के विरुद्ध माहौल बनाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट और संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।

एडीजी आलोक सिंह की सीधी निगरानी में बहुस्तरीय

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