लखनऊl उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक शिवपाल सिंह यादव ने प्रदेश सरकार के बजट पर सवाल उठाते हुए इसे “जनता को लूटने का दस्तावेज” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त है और इतना बड़ा बजट केवल घोटालों और बंदरबांट के लिए लाया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘बाबरी कभी न बनने’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पास लोगों को आपस में लड़ाने के अलावा कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करने वाले बयानों पर।
वहीं, सपा विधायक अनिल प्रधान ने सदन में किसानों की बदहाली का मुद्दा जोरशोर से उठाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर किसानों की जमीन औने-पौने दामों पर अधिग्रहित की जा रही है। किसान कर्ज के बोझ और मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहा है। अन्ना पशुओं से फसलें बर्बाद हो रही हैं। खाद के लिए किसानों को कई-कई दिन लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है और कई बार पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ती हैं। डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसान और अधिक परेशान हो रहे हैं।
सपा विधायकों के आरोपों पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डीजल की कीमतें पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु सहित लगभग 20 राज्यों की तुलना में कम हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में डीजल पर वैट अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम है, इसलिए सपा का आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने के लिए लगातार प्रयासरत है तथा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि सड़कें हवा में नहीं बनतीं, इसके लिए जमीन की आवश्यकता होती है। किसानों से वार्ता कर उन्हें बाजार दर पर मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की जनता सपा सरकार का कार्यकाल नहीं भूली है, जब उद्योगपतियों के लिए नोएडा और गाजियाबाद में गोलियां चली थीं।
वहीं, प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी सपा पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष का काम केवल विरोध करना रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि वे विरोध नहीं करेंगे तो चुनाव में मुद्दा क्या रहेगा। राजभर ने दावा किया कि सपा सरकार में दिव्यांगों को 300 रुपये पेंशन मिलती थी, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया है। बुजुर्गों को पेंशन दी जा रही है और किसान सम्मान निधि सीधे किसानों के खातों में पहुंच रही है।
विधानसभा में बजट को लेकर चली इस तीखी बहस ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में बजट पर चर्चा के दौरान और भी तीखे बयान सामने आने की संभावना है।






