लखनऊ। उत्तर प्रदेश का आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित बजट 9.12 लाख करोड़ रुपये का है, जो आर्थिक आकार के लिहाज से भारत के चार पड़ोसी देशों—पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका—के बजट से भी बड़ा है। यह आंकड़ा न सिर्फ प्रदेश की बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य की विकास प्राथमिकताओं को भी रेखांकित करता है।
प्रदेश सरकार का वर्ष 2025-26 का बजट 8.08 लाख करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 के लिए 9.12 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। यानी एक वर्ष में करीब 1.04 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, कृषि और औद्योगिक विकास पर बढ़े फोकस का संकेत मानी जा रही है।
यदि पड़ोसी देशों के बजट से तुलना करें तो पाकिस्तान का पिछला बजट 63 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। 90 रुपये प्रति डॉलर के औसत विनिमय दर से इसकी गणना करें तो यह लगभग 5.67 लाख करोड़ रुपये बैठता है। इसी प्रकार बांग्लादेश का बजट लगभग 3.69 लाख करोड़ रुपये, श्रीलंका का 1.46 लाख करोड़ रुपये और नेपाल का करीब 73 हजार करोड़ रुपये रहा है। इन चारों देशों का बजट उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित बजट से काफी कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में आर्थिक संकट और आंतरिक अस्थिरता के कारण बजट विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं। वहीं नेपाल और बांग्लादेश भी राजस्व और संसाधनों की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश देश की जीडीपी में बड़ा योगदान देने वाला राज्य बनता जा रहा है और बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, रक्षा कॉरिडोर, डेटा सेंटर, औद्योगिक निवेश और शहरी विकास जैसी परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, उत्तर प्रदेश का बजट कई मध्यम आकार के देशों की अर्थव्यवस्था के बराबर पहुंचता जा रहा है। प्रदेश सरकार का दावा है कि राज्य की अर्थव्यवस्था को ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए पूंजीगत व्यय, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर 9.12 लाख करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट उत्तर प्रदेश को न सिर्फ देश में बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक परिदृश्य में भी एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित करता दिख रहा है।

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