फर्रुखाबाद| जिले की सातनपुर मंडी रोड इन दिनों किसी युद्धग्रस्त क्षेत्र जैसी हालत में पहुंच चुकी है, जहां न नियम दिखाई देते हैं और न उन्हें लागू कराने वाला कोई जिम्मेदार। रोज़ लगने वाला भीषण जाम अब अपवाद नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर समस्या के बावजूद ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह नदारद रहती है, मानो इस सड़क से प्रशासन का कोई लेना-देना ही न हो।
मंडी रोड पर भारी वाहनों की बेतरतीब आवाजाही ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। ट्रैक्टर और ट्रक चालक जल्दी निकालने के चक्कर में दूसरी लेन में घुस जाते हैं, सड़क को अपनी मर्जी से घेर लेते हैं और देखते ही देखते लंबा जाम लग जाता है। न कोई सिपाही इन्हें रोकने वाला, न कोई अधिकारी व्यवस्था संभालने वाला। नतीजा यह कि दो पहिया, चार पहिया, एंबुलेंस और स्कूली वाहन सभी एक ही जाल में फंसकर रह जाते हैं।
जाम की मार सिर्फ समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है। घंटों खड़े वाहनों से उड़ती धूल आम लोगों की सेहत पर सीधा हमला कर रही है। सांस के मरीज, बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आंखों में जलन, खांसी, दमा और एलर्जी की शिकायतें बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन की संवेदनशीलता शून्य नजर आती है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही अधिकारी हरकत में आएंगे?
स्थानीय लोगों का गुस्सा अब उबाल पर है। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन नतीजा सिफर रहा। मंडी जैसे व्यस्त और राजस्व देने वाले क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था का इस कदर ध्वस्त होना सीधे-सीधे प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। न स्थायी ट्रैफिक प्लान है, न भारी वाहनों के लिए अलग मार्ग, न पुलिस की नियमित तैनाती—सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।
जनता की स्पष्ट मांग है कि सातनपुर मंडी रोड पर तत्काल ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की जाए, ट्रैक्टर-ट्रकों के लिए सख्त नियम लागू हों, वैकल्पिक मार्ग तय किए जाएं और धूल नियंत्रण के उपाय किए जाएं। अगर अब भी प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं, तो यह समस्या केवल जाम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण साबित होगी।

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