इटावा। जनपद में डॉक्टर के पर्चे के बिना एंटीबायोटिक दवाओं की ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) बिक्री धड़ल्ले से जारी है। नियमों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मेडिकल स्टोरों पर बिना पर्ची के एंटीबायोटिक आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
मामूली बुखार, खांसी, जुकाम या दर्द जैसी सामान्य समस्याओं में लोग सीधे मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक ले रहे हैं। स्टोर संचालक भी बिना किसी चिकित्सकीय सलाह या पूछताछ के दवाएं थमा रहे हैं। नियमों के अनुसार एंटीबायोटिक्स केवल पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे पर ही बेची जानी चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है।
ओटीसी बिक्री पर प्रभावी रोक न लग पाने के पीछे जिला औषधि विभाग में स्टाफ की भारी कमी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पूरे जनपद की जिम्मेदारी महज एक औषधि निरीक्षक और एक बाबू के भरोसे है। निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण सैकड़ों मेडिकल स्टोरों पर नियमित और सख्त जांच नहीं हो पा रही है, जिससे हालात जस के तस बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार जनपद में 800 से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित हैं, जहां प्रतिदिन लाखों रुपये की दवाओं की बिक्री होती है। इनमें कई स्टोर बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के भी चल रहे हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। औषधि विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और दिशा-निर्देश दिए जाने के बावजूद एंटीबायोटिक की ओटीसी बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग पा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जरूरत और गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों के इलाज में दिक्कतें आ सकती हैं। ऐसे में जरूरत है कि औषधि विभाग को पर्याप्त स्टाफ और सख्त निगरानी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि नियमों का कड़ाई से पालन हो और आमजन के स्वास्थ्य को होने वाले खतरे को रोका जा सके।


