एटा। मेडिकल कॉलेज एटा में सांस की बीमारी से पीड़ित 70 वर्षीय महिला मरीज मानवती की एक्स-रे कक्ष में मृत्यु हो जाने से हड़कंप मच गया। मृतका के स्वजनों ने मेडिकल कॉलेज के स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें लगभग एक घंटे तक स्ट्रेचर नहीं मिला, जिससे मजबूर होकर मरीज को खुद खींचकर एक्स-रे कक्ष तक ले जाना पड़ा। इसी दौरान महिला की हालत बिगड़ गई और एक्स-रे कक्ष में ही उसकी मौत हो गई।
थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव नगला मुई निवासी मानवती को रविवार शाम अचानक सांस लेने में दिक्कत बढ़ गई थी। परिजन उन्हें आनन-फानन में करीब पांच बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद महिला को मेडिसिन विभाग के महिला वार्ड में भर्ती कर लिया। चिकित्सकों को आशंका थी कि महिला के फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है, इसलिए सोमवार को एक्स-रे कराने की सलाह दी गई थी।
सोमवार को वार्ड से एक्स-रे कक्ष तक मरीज को ले जाने के लिए परिजन स्ट्रेचर की तलाश करते रहे, लेकिन आरोप है कि स्टाफ ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। परिजनों का कहना है कि एक स्ट्रेचर यह कहकर ले लिया गया कि वह वीआईपी के लिए रिजर्व है। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद जब स्ट्रेचर मिला तो परिजन खुद ही उसे खींचते हुए मरीज को एक्स-रे कक्ष तक ले गए। इसी दौरान एक्स-रे कक्ष पहुंचते ही मानवती की मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। आसपास के लोग और रिश्तेदार भी मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। परिजनों ने रोते-बिलखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि समय पर स्ट्रेचर और सहायता मिल जाती तो शायद महिला की जान बच सकती थी। बाद में परिजन शव को अपने साथ ले गए।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को वार्ड बॉय द्वारा अटेंड करने, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की व्यवस्था करने का प्रावधान है, लेकिन अक्सर स्टाफ की अनुपस्थिति में तीमारदारों को ही यह काम करना पड़ता है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य बलवीर सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर की कोई कमी नहीं है। तीमारदारों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में कोई भी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


