– पूर्व ऊर्जा मंत्री स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी ‘मंजुल’ को भावभीनी श्रद्धांजलि
– – शरद कटियार
शाम से आँखों में नमी-सी है,
आज फिर आपकी कमी-सी है।
आप दूर क्या हुए हमसे,
ये दिलों की नब्ज़ तब से थमी-सी है।
दुनिया की इस भीड़ में कोई आप-सा क्यों नहीं…
पूज्य स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी ‘मंजुल’ (Manjul) का जीवन भारतीय राजनीति (politics) में मूल्यों, विचारधारा और निर्भीकता का प्रतीक रहा है। वे उन विरले नेताओं में थे जिनके लिए राजनीति सत्ता का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की निःस्वार्थ सेवा थी। उनका नाम आते ही एक ऐसे व्यक्तित्व की छवि उभरती है, जो सरल था, स्पष्ट था और हर परिस्थिति में अपने सिद्धांतों पर अडिग था।
उन्होंने राजनीति को सुविधाओं का मार्ग नहीं बनाया, बल्कि इसे त्याग और तपस्या का पथ माना। सत्ता में रहते हुए भी उनका जीवन सादगी से भरा रहा। न दिखावा, न आडंबर केवल कर्म और कर्तव्य। यही कारण था कि वे जनता के बीच भरोसे का नाम बन गए।
उत्तर प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री के रूप में स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ‘मंजुल’ ने बिजली व्यवस्था को केवल विभागीय दायित्व नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन से जुड़ा संवेदनशील विषय माना। उनके कार्यकाल में ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक बिजली पहुँचाने, लाइन लॉस कम करने, बिजली चोरी रोकने और ढाँचागत सुधार पर ठोस निर्णय लिए गए। उन्होंने यह सिद्ध किया कि यदि नीयत साफ हो तो व्यवस्था में सुधार संभव है।
संगठन के प्रति उनकी निष्ठा अनुकरणीय थी। वे कार्यकर्ताओं को केवल चुनावी साधन नहीं, बल्कि पार्टी की आत्मा मानते थे। बूथ स्तर का कार्यकर्ता हो या वरिष्ठ पदाधिकारी—सभी के साथ उनका व्यवहार समान, आत्मीय और सम्मानपूर्ण रहता था। उन्होंने हजारों कार्यकर्ताओं को न केवल राजनीति सिखाई, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति का पाठ भी पढ़ाया।
उनकी सबसे बड़ी पहचान थी—निडरता और बेदाग छवि। वे किसी दबाव में नहीं झुके, न ही कभी अपने विचारों से समझौता किया। जो सही लगा, वही कहा और किया। यही कारण है कि उनके विरोधी भी उनके व्यक्तित्व का सम्मान करते थे।
आज जब राजनीति में अवसरवाद और तात्कालिक लाभ की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, तब स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ‘मंजुल’ का जीवन हमें यह याद दिलाता है कि राजनीति आज भी सिद्धांतों, संस्कारों और राष्ट्रनिष्ठा के साथ की जा सकती है। उनका जाना भारतीय जनता पार्टी ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
वे भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनके विचार, उनका संघर्ष और उनका नैतिक साहस आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।यह केवल श्रद्धांजलि नहीं,
एक सच्चे राष्ट्रसेवक को शत-शत नमन है।आप अमर हैं—अपने विचारों में, अपने कर्मों में।


