लखनऊl राजधानी में नए विधानभवन के निर्माण को लेकर सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की खाली कराई गई जमीन पर विधानभवन बनाए जाने की कवायद अब निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। शासन के निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके माध्यम से विधानभवन का डीपीआर और डिजाइन तैयार कराया जाएगा।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार करीब दस महीने पहले प्राधिकरण ने सहारा शहर में अपने हिस्से की 75 एकड़ जमीन कब्जे में ली थी। इसके बाद सितंबर माह में लखनऊ नगर निगम ने भी लीज निरस्त कर अपने हिस्से की 170 एकड़ जमीन पर कब्जा प्राप्त कर लिया। इस तरह कुल 245 एकड़ जमीन अब पूरी तरह खाली हो चुकी है, जिस पर नए विधानभवन के निर्माण की योजना बनाई गई है।
शासन के निर्देश पर इस जमीन की पैमाइश कराकर उसकी रिपोर्ट पहले ही भेजी जा चुकी है। उच्च स्तर पर सहारा शहर की इस जमीन को विधानभवन निर्माण के लिए उपयुक्त मानते हुए सहमति बन चुकी है। अब आगे की प्रक्रिया के तहत कंसल्टेंट नियुक्त कर डीपीआर, भवन का आर्किटेक्चरल डिजाइन, ट्रैफिक प्लान और अन्य आधारभूत ढांचे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने पुष्टि की है कि सहारा शहर की जमीन पर विधानभवन निर्माण को लेकर प्रक्रिया जारी है।
जानकारों के अनुसार सरकार बीते कई वर्षों से नए विधानभवन के लिए लगभग 200 एकड़ जमीन की तलाश कर रही थी। सहारा शहर में नगर निगम की 170 एकड़ और एलडीए की 75 एकड़ जमीन मिलाकर कुल 245 एकड़ का बड़ा भूखंड उपलब्ध होने से यह समस्या समाप्त हो गई है। यह क्षेत्र गोमतीनगर में स्थित होने के कारण लोकेशन, चौड़ी सड़कों और आवागमन की बेहतर सुविधाओं के लिहाज से भी बेहद उपयुक्त माना जा रहा है। इन्हीं कारणों से शासन ने यहीं नया विधानभवन बनाने का मन बनाया है।
नए विधानभवन के निर्माण से राजधानीवासियों को कई अहम सहूलियतें मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में लोकभवन और मौजूदा विधानभवन में मुख्यमंत्री के आगमन और प्रस्थान के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर यातायात रोका जाता है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी होती है। नया विधानभवन बनने के बाद ट्रैफिक दबाव कम होगा और लोगों को जाम से राहत मिलेगी।
इसके अलावा वर्तमान विधानभवन के आसपास पार्किंग की गंभीर समस्या है, जहां बड़ी संख्या में वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं। नए परिसर में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था होने से इस समस्या का समाधान संभव है। हजरतगंज और लालबाग जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े अस्पताल और स्कूल भी स्थित हैं, जहां वीआईपी मूवमेंट के चलते ट्रैफिक बंद होने से आमजन को परेशानी होती है, जो नए विधानभवन के बनने से दूर होगी।
साथ ही, नए विधानभवन के निर्माण के बाद हजरतगंज क्षेत्र को एक बेहतर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करना भी आसान होगा। वर्तमान में सुरक्षा कारणों और यातायात दबाव के चलते कई विकास योजनाएं अटकी हुई हैं, जिन पर नए विधानभवन के बाद तेजी से काम हो सकेगा। कुल मिलाकर सहारा शहर में प्रस्तावित नया विधानभवन न केवल प्रशासनिक दृष्टि से बल्कि आम जनता की सुविधा और शहर के विकास के लिहाज से भी अहम साबित होने की उम्मीद है।






