यूथ इंडिया
तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश मानसरोवर केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि विश्व की सबसे प्राचीन और रहस्यमयी आध्यात्मिक धरोहरों में से एक है। सदियों से यह स्थान मानव आस्था, साधना और आत्मिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां की यात्रा जितनी कठिन मानी जाती है, उतनी ही गहरी और शांति देने वाली भी है।
भगवान शिव का दिव्य निवास
हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं शिव परिवार सहित ध्यानस्थ अवस्था में विराजमान हैं और यहीं से सृष्टि के संतुलन का संचालन होता है। कैलाश पर्वत का शिखर आज तक अजेय माना जाता है—किसी भी पर्वतारोही द्वारा इस पर चढ़ाई नहीं की जा सकी है, जिसे लोग इसकी दिव्यता से जोड़कर देखते हैं।
मानसरोवर झील: आत्मशुद्धि का प्रतीक
कैलाश पर्वत के समीप स्थित मानसरोवर झील को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार इसके जल में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। कहा जाता है कि स्वयं ब्रह्मा ने इस झील की रचना की थी। इसकी शांत जलराशि श्रद्धालुओं को आंतरिक शांति और आत्मचिंतन की अनुभूति कराती है।
कैलाश परिक्रमा: तपस्या और आस्था की परीक्षा
कैलाश पर्वत की परिक्रमा, जिसे ‘कोरा’ कहा जाता है, लगभग 52 किलोमीटर लंबी होती है। यह यात्रा अत्यंत कठिन मानी जाती है—ऊंचाई, बर्फीली हवाएं, कम ऑक्सीजन और दुर्गम रास्ते हर कदम पर श्रद्धालुओं की परीक्षा लेते हैं। इसके बावजूद श्रद्धालु पूरी श्रद्धा, संयम और धैर्य के साथ परिक्रमा पूरी करते हैं। मान्यता है कि एक बार कैलाश की परिक्रमा करने से जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
चार धर्मों की साझा आस्था
कैलाश–मानसरोवर की विशेषता यह है कि यह केवल एक धर्म तक सीमित नहीं है।
बौद्ध धर्म में इसे ध्यान और करुणा का केंद्र माना जाता है।
जैन परंपरा के अनुसार प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव को इसी क्षेत्र में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
बोन धर्म में कैलाश को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है।
यही कारण है कि कैलाश–मानसरोवर को विश्व की साझा आध्यात्मिक विरासत कहा जाता है।
आत्मा की यात्रा
कैलाश–मानसरोवर की यात्रा केवल शरीर से तय की गई दूरी नहीं है, बल्कि यह आत्मा की यात्रा मानी जाती है। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अपने भीतर झांकने, अहंकार त्यागने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का प्रयास करता है। कठिनाइयों से भरी यह यात्रा अंततः श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतोष और आत्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
कैलाश–मानसरोवर आज भी मानव आस्था का वह शिखर है, जहां पहुंचकर व्यक्ति स्वयं को ईश्वर के सबसे निकट महसूस करता है।






