किसान और उपभोक्ता पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ
फर्रुखाबाद। देश के अधिकांश राज्यों में आलू पर मंडी टैक्स समाप्त किए जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश में अब तक 5 प्रतिशत मंडी टैक्स वसूला जा रहा है। इसे लेकर किसान, व्यापारी और आम उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
जहाँ एक ओर अन्य राज्यों में मंडी टैक्स समाप्त होने से किसानों को बेहतर दाम और उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है, वहीं उत्तर प्रदेश में टैक्स जारी रहने से आलू की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि टैक्स के कारण मंडियों में आवक प्रभावित हो रही है और छोटे व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कटियार ने कहा
“जब देश के लगभग सभी राज्यों में आलू पर मंडी टैक्स समाप्त कर दिया गया है, तो उत्तर प्रदेश में इसे जारी रखना पूरी तरह अनुचित है। इसका सीधा नुकसान किसान और आम उपभोक्ता को उठाना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के हित में तत्काल मंडी टैक्स समाप्त करे।”
उन्होंने आगे कहा कि मंडी टैक्स समाप्त होने से न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि महँगाई पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा।
सरकार से उठ रही मांग
इस मुद्दे को लेकर अब यह सवाल ज़ोर पकड़ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह किसानों और व्यापारियों को राहत नहीं दी जानी चाहिए। जानकारों का मानना है कि यदि मंडी टैक्स हटाया जाता है, तो इससे प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
फिलहाल किसान संगठनों और व्यापारियों द्वारा सरकार से मंडी टैक्स समाप्त करने की मांग की जा रही है।

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