शाहजहांपुर: कहते हैं कि समाज की असली ताकत उसके संवेदनशील लोगों में बसती है। जब कोई जरूरतमंद लंबे समय तक सहायता के लिए भटकता रहे और फिर अचानक कोई हाथ थाम ले, तो वह क्षण केवल मदद का नहीं, बल्कि विश्वास के पुनर्जन्म का होता है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है।कांट क्षेत्र के निवासी मिश्रा, जो दिव्यांग (Divyang) हैं, काफी समय से ट्राइसाइकिल (tricycle) प्राप्त करने के लिए प्रयासरत थे।
कई दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लग रही थी। उम्मीद जैसे धीरे-धीरे धुंधली पड़ती जा रही थी।इसी बीच एक दिन वह खिरनीबाग धर्मशाला पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात समाजसेवी नीरज बाजपेई से हुई। बातचीत के दौरान जब उनकी समस्या सामने आई, तो बिना देर किए नीरज बाजपेई ने उनके सभी आवश्यक दस्तावेज तुरंत ऑनलाइन करवाए और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।समाजसेवी हरिशरण बाजपेई के सहयोग और प्रयासों से आखिरकार वह दिन आ ही गया, जब मिश्रा के हाथों में ट्राइसाइकिल सौंपी गई।
काफी दिनों की प्रतीक्षा समाप्त हुई और चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान लौट आई।यह पहल न केवल एक दिव्यांग को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि छोटी-सी संवेदना किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। जरूरत है तो बस आगे बढ़कर किसी के अंधेरे रास्ते में एक दीप जलाने की।


