– हनुमान मंदिर ट्रस्ट की 65 बीघा भूमि पर माफिया कब्जे का पूरा सच
– अभिलेखों में हेरफेर, फर्जी आदेश और हिंसा की रची गई थी साजिश
– डीएम आशुतोष कुमार द्विवेदी के आदेश से टूटा माफिया तंत्र।
फर्रुखाबाद: थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के अर्राह पहाड़पुर स्थित हनुमान जी मंदिर ट्रस्ट की लगभग 65 बीघा अति बहुमूल्य भूमि को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब जिले के सबसे बड़े भू-माफिया कांड के रूप में सामने आया है। इस भूमि की सरकारी कीमत करीब 70 करोड़ रुपये आंकी गई है। ट्रस्ट के सर्वराकार एकलव्य कुमार (Eklavya Kumar)की तहरीर पर पुलिस ने कुख्यात माफिया अनुपम दुबे (Anupam Dubey) सहित उसके गिरोह के 10 गुर्गों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तहरीर और प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार, हनुमान मंदिर ट्रस्ट की इस भूमि को हड़पने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में सुनियोजित हेरफेर, कूटरचित दस्तावेजों की तैयारी और अधिकारियों के कथित फर्जी आदेशों का सहारा लिया गया। जमीन को कागजों में निजी संपत्ति दर्शाकर गुंडई और दबंगई के बल पर कब्जा कराया गया और बाद में उसका विक्रय भी कराया गया।
हनुमान मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने दलित समाज से आने वाले एकलव्य कुमार को ट्रस्ट का सर्वराकार नियुक्त किया था। एकलव्य कुमार ने माफिया तंत्र के इस फर्जीवाड़े को चुनौती दी और कानूनी लड़ाई की शुरुआत की। उन्होंने दस्तावेज जुटाए, प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की और हर स्तर पर सच को सामने लाने का प्रयास किया।
तहरीर में आरोप लगाया गया है कि जैसे ही फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने लगा, माफिया तंत्र बौखला गया। पूर्व में जिलाधिकारी द्वारा यह भूमि माफिया से कुर्क कर ली गई थी और बाद में हनुमान मंदिर ट्रस्ट में निहित कर दी गई। इसके बाद सर्वराकार एकलव्य कुमार को झूठे हत्या के मामले में फंसाने की साजिश रची गई।
आरोप है कि मौके पर भीड़ को भड़काकर एकलव्य कुमार, उनके पुत्र और परिवार की हत्या कराने का प्रयास किया गया। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर हालत के कारण वह तत्काल तहरीर नहीं दे सके।
इलाज के बाद 7 फरवरी को एकलव्य कुमार ने थाना मऊदरवाजा में तहरीर देकर पूरे प्रकरण का सिलसिलेवार खुलासा किया। इसके आधार पर पुलिस ने माफिया अनुपम दुबे समेत 10 नामजद और कई अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
इस पूरे प्रकरण में आशुतोष कुमार द्विवेदी की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। प्रशासनिक जांच के दौरान जब फर्जीवाड़ा स्पष्ट हुआ, तो पहले भूमि को कुर्क किया गया
विस्तृत जांच के बाद पूरी 65 बीघा जमीन को विधिवत हनुमान जी मंदिर ट्रस्ट में निहित करने का आदेश पारित किया गया
डीएम के इस साहसिक, निष्पक्ष और कानूनसम्मत निर्णय से माफिया तंत्र की कमर टूट गई। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को भूमि माफियाओं के खिलाफ बड़ी मिसाल माना जा रहा है।


