नई दिल्ली| केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर उठ रही आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि इस समझौते से भारतीय किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते के फ्रेमवर्क में किसानों और देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है तथा किसी भी प्रमुख फसल या संवेदनशील कृषि उत्पाद को अमेरिकी आयात के लिए नहीं खोला गया है।
भोपाल में रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है, जिससे भारत के कृषि निर्यात को बड़ा लाभ मिला है। इसके विपरीत भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों को ऐसी कोई टैरिफ छूट नहीं दी है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेड डील के तहत अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर औसतन टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में देश और किसानों के हितों से समझौता न हो। इसी कारण उन कृषि उत्पादों को इस डील से बाहर रखा गया है, जिनसे घरेलू किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था। उन्होंने दोहराया कि भारत की प्रमुख फसलें, फल और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित हैं।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, अनाज, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, केले, स्ट्रॉबेरी, चेरी, हरी मटर, दालें, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। अमेरिका से किसी भी प्रकार के लिक्विड या प्रोसेस्ड डेयरी उत्पाद जैसे मक्खन, घी, पनीर या चीज के आयात की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही भारतीय मसाले भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय मसालों सहित कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ शून्य किए जाने से निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा लाभ किसानों और विशेष रूप से महिला उद्यमियों को मिलेगा। कृषि मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब तक नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) कर चुका है और कई अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है।
शिवराज सिंह चौहान ने इन समझौतों को 2047 तक विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक बाजारों में भारत की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित कर रही है।




