लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में चल रही चर्चाओं और अटकलों के बीच पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर पूरी तरह स्पष्ट और दो टूक बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वह बहन जी यानी मायावती का सम्मान करते हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
पूर्व मंत्री ने कहा कि उनके बसपा में शामिल होने को लेकर जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे भ्रम और अफवाह से ज्यादा कुछ नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“कांशीराम के समय की बसपा अब नहीं बची है। आज की बसपा उस विचारधारा और संघर्ष से काफी दूर नजर आती है, जिसकी नींव कांशीराम जी ने रखी थी। कुछ लोग जानबूझकर मेरे बसपा में जाने का भ्रम फैला रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।”
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मौजूदा राजनीतिक हालात पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अखिलेश यादव एक बेहतरीन और संवेदनशील नेता हैं, जिन्होंने युवाओं, किसानों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आवाज को मजबूती से उठाया है। उनके अनुसार, अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में एक मजबूत और विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की जनता आज बदलाव चाहती है और ऐसी राजनीति की तलाश में है, जो केवल नारों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर काम करे। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि बसपा में उनकी वापसी या शामिल होने की चर्चाएं पूरी तरह निराधार हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान से न सिर्फ अफवाहों पर विराम लगेगा, बल्कि आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए सियासी समीकरणों की तस्वीर भी और स्पष्ट होगी।






