लखनऊ। राजधानी में जलकल विभाग के भीतर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि बंद पड़े ट्यूबवेल को कागजों में चालू दिखाकर भुगतान किया गया, जिससे सरकारी धन की खुली बंदरबांट हुई।
मामले में मेसर्स अदम्य एंटरप्राइजेज को भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। यह भुगतान जलकल विभाग जोन-8 द्वारा किया गया, जबकि संबंधित ट्यूबवेल वास्तव में संचालन में नहीं थे।
सूत्रों के अनुसार, इस भुगतान को महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने भी अनुमति दी। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी भौतिक निरीक्षण के ही फाइल पर स्वीकृति दे दी गई।
इतना ही नहीं, आरोप है कि दूसरे वर्क ऑर्डर में भी उसी फर्म को ट्यूबवेल संचालन का काम दे दिया गया, जिसमें लाखों रुपये का भुगतान शामिल है। इससे विभागीय मिलीभगत और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि जनता के पैसों की लूट पर रोक लग सके।






