लखनऊ। प्रदेश सरकार का बहुप्रतीक्षित बजट सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले रविवार को इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। बजट सत्र के आगाज से पहले सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों की बैठकों का दौर भी चल सकता है, जिसमें रणनीति और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रदेश सरकार की ओर से 11 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा, जिसका आकार इस बार करीब 9 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बजट में प्रदेश के समग्र विकास और आम जनता की सुविधाओं पर विशेष फोकस रहेगा। सड़क, पुल, शहरी विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों पर बड़ा खर्च प्रस्तावित किया जा सकता है। पिछले वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश का बजट करीब 8.08 लाख करोड़ रुपये का था, जो उससे पहले के साल की तुलना में 9.8 प्रतिशत अधिक था। इस बार का बजट उससे भी बड़ा और ज्यादा विस्तार वाला होने की संभावना जताई जा रही है।
बजट में युवाओं के रोजगार, किसानों की आय बढ़ाने और गरीब व जरूरतमंद वर्ग के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर खास जोर रहेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किए जाने की तैयारी है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए भी बजट में विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अनुमान के मुताबिक कुल बजट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर, 15 प्रतिशत शिक्षा, 12 प्रतिशत कृषि, 8 प्रतिशत स्वास्थ्य और करीब 5 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य विकास की रफ्तार को बनाए रखते हुए वित्तीय संतुलन कायम रखना भी है।
इधर, बजट सत्र के दौरान सुरक्षा और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने विधानमंडल के वर्ष 2026 के प्रथम सत्र के सुचारु और सुरक्षित संचालन को लेकर सभी इंतजामों का जायजा लिया। बैठक में क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) की तैनाती, एंटी एक्सप्लोसिव और एंटी सबोटाज जांच, सभी प्रवेश द्वारों की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और विधायकों व उनके सुरक्षा कर्मियों की बैठने की व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि सत्र के दौरान किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक न हो और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध ढंग से व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक गरिमा और संसदीय परंपराओं की रक्षा के लिए सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बेहद जरूरी है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप कुमार दुबे, पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






