अलीगढ़| प्रदेश में साइबर ठग लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला अलीगढ़ का है, जहां सेवानिवृत्त जिला कृषि अधिकारी नत्थीलाल शर्मा को 20 दिनों तक डिजिटल आतंक में रखा गया और 42 लाख रुपये की ठगी की गई। ठगों ने खुद को आईपीएस अधिकारी और दरोगा बताते हुए मनी लॉंड्रिंग, ड्रग स्मगलिंग और ह्यूमन ट्रैफिकिंग में संलिप्त होने का डर दिखाया। साइबर क्राइम थाना ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एटा चुंगी निवासी नत्थीलाल शर्मा ने बताया कि 10 जनवरी को उन्हें अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को अजय गुप्ता, जूनियर टेलीकोम ऑफिसर बाराखंभा दिल्ली से बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से एक सिम ली गई है और उनके नाम से बैंक खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। नत्थीलाल ने इसे असत्य बताया, लेकिन ठगों ने वीडियो कॉल के माध्यम से दबाव डालना शुरू किया और उनके सभी एफडी और बचत खातों की जानकारी ले ली। आरोपियों ने चेतावनी दी कि अगर किसी को इस मामले की जानकारी दी तो उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा।

उसी दिन शाम को लगातार तीन नंबरों से कॉल आई, जिसमें नत्थीलाल को वीडियो कॉल के जरिए हर एक घंटे में संपर्क बनाए रखने का निर्देश दिया गया। कॉलर ने कहा कि उन्हें सुबह-शाम दोनों समय उनसे चर्चा करनी होगी। झांसे में आकर नत्थीलाल ने वीडियो कॉल में बातचीत की और 28 जनवरी तक 14 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके अगले दिन 28 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ठगों को पहुंचाए गए।

इसके बाद, जब ठगों के संपर्क टूट गए, तो पीड़ित ने परिजनों को जानकारी दी। एसपी देहात और साइबर क्राइम अधिकारी अमृत जैन ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के मामले में ठग तेजी से तकनीकी उपायों का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाते हैं और इस पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

साइबर क्राइम विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी रोकने के लिए लोगों को किसी भी अज्ञात कॉल या वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत और बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। पुलिस ने जनता से अपील की है कि ऐसे मामलों में तुरंत साइबर क्राइम थाना या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

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