रामनगर से देश-दुनिया तक उत्तराखंड की पहचान
रामनगर (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में स्थित जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान न केवल भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है, बल्कि यह राज्य के पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोज़गार का सबसे बड़ा आधार भी है। इसका प्रवेश द्वार कहलाने वाला रामनगर आज जंगल-पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन चुका है।
भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान
1936 में स्थापित यह उद्यान पहले हैली नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता था। बाद में महान शिकारी-संरक्षक और पर्यावरणविद जिम कॉर्बेट के सम्मान में इसका नाम बदला गया। करीब 520 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह पार्क साल, शीशम और घने जंगलों से समृद्ध है।
जिम कॉर्बेट देश के सबसे अहम टाइगर रिज़र्व में शामिल है। यहां बाघों के साथ हाथी, तेंदुआ, भालू, चीतल, सांभर और 600 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। यही कारण है कि वन्यजीव प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए यह इलाका विशेष महत्व रखता है।
रामनगर रेलवे स्टेशन और सड़क मार्ग से आसानी से जुड़ा होने के कारण हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यहां से ढिकाला, बिजरानी, झिरना, दुर्गादेवी जैसे प्रमुख जोन में जंगल सफारी संचालित होती है।
पर्यटन सीजन (अक्टूबर से जून) में होटल, रिसॉर्ट, गाइड, जिप्सी चालक और स्थानीय व्यवसायों को बड़ा लाभ मिलता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को संजीवनी
कॉर्बेट पर्यटन से रामनगर और आसपास के गांवों में हज़ारों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोज़गार मिला है। होमस्टे, हस्तशिल्प, टैक्सी सेवा और लोकल फूड व्यवसाय तेजी से बढ़े हैं। यह क्षेत्र उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ साबित हो रहा है।
संरक्षण बनाम विकास की चुनौती
पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच जंगल संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। प्रशासन द्वारा ई-परमिट, सीमित सफारी और पर्यावरणीय नियम लागू किए गए हैं ताकि वन्यजीवों और जंगल की सुरक्षा बनी रहे।
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, संरक्षण और रोज़गार का संतुलित मॉडल है। रामनगर के लिए यह जंगल पहचान भी है और भविष्य भी। यदि संरक्षण और पर्यटन में संतुलन बना रहा, तो जिम कॉर्बेट आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उतना ही समृद्ध रहेगा।


