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Thursday, April 2, 2026

केवल 10 फीसदी लोग ही क्यों बनते हैं आर्थिक रूप से सफल?

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— विवेक गंगवार, सीईओ, Nomadic

आज की दुनिया में सफलता (successful) और असफलता के बीच का अंतर केवल संसाधनों या अवसरों का नहीं, बल्कि सोच (Mindset) का है। एक कड़वा लेकिन सच्चा तथ्य यह है कि दुनिया की कुल आबादी में मात्र 10 फीसदी लोग ही सकारात्मक सोच के साथ जीवन और निर्णयों को आगे बढ़ाते हैं, जबकि शेष 90 फीसदी लोग नकारात्मक सोच, डर और संदेह में उलझे रहते हैं।

यही कारण है कि दुनिया में सिर्फ 10 फीसदी लोग ही वास्तविक रूप से धन, स्थिरता और स्वतंत्रता अर्जित कर पाते हैं, जबकि बाकी लोग जीवनभर संघर्ष करते रह जाते हैं। यह विचार विवेक गंगवार, सीईओ Nomadic ने साझा करते हुए कहा कि “पैसा किसी विशेष वर्ग या प्रतिभा का मोहताज नहीं होता, बल्कि वह साहसिक और सकारात्मक सोच का परिणाम होता है।

विवेक गंगवार के अनुसार, नकारात्मक सोच व्यक्ति को जोखिम से डराती है। वह नए अवसरों को देखने के बजाय असफलता की कल्पना करने लगता है। वहीं सकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता रखता है। वह सीखता है, आगे बढ़ता है और गलतियों से डरने के बजाय उनसे अनुभव अर्जित करता है।

90 फीसदी लोग दिन-रात मेहनत करने के बावजूद इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे सिस्टम को समझने के बजाय 10 फीसदी से जलन और मानसिक प्रतिस्पर्धा मानते हुए केवल संघर्ष करते रहते हैं। जबकि 10 फीसदी लोग पहले सिस्टम, टेक्नोलॉजी और अवसरों को समझते हैं, फिर स्मार्ट निर्णय लेते हैं।

यह भी एक भ्रम है कि सकारात्मक सोच कुछ लोगों में जन्म से होती है। वास्तव में यह एक सीखी जाने वाली मानसिकता है। सही मार्गदर्शन, सही वातावरण और सही जानकारी व्यक्ति की सोच को पूरी तरह बदल सकती है।

विवेक गंगवार का मानना है कि आज के डिजिटल और डिसेंट्रलाइज़्ड युग में अवसरों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो केवल खुद पर विश्वास, सीखने की भूख और पॉजिटिव माइंडसेट की।अंत में वे कहते हैं “जब तक सोच नहीं बदलेगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे। दुनिया में 10 फीसदी लोग इसलिए आगे हैं क्योंकि उन्होंने डर नहीं, दिशा को चुना।”

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