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Friday, March 13, 2026

प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा चीनी मांझा, प्रशासनिक सख्ती बेअसर

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बदायूं: शासन द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद शहर में चीनी मांझे की चोरी-छिपे बिक्री जारी है। पतंगों की दुकानों की आड़ में दुकानदार धागे के साथ खतरनाक चीनी मांझा ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं। शहर के छह सड़का, घंटाघर और बड़े बाजार समेत कई इलाकों में इसकी बिक्री होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके अलावा गली-मोहल्लों की छोटी दुकानों पर भी यह जानलेवा मांझा आसानी से मिल रहा है।

चीनी मांझे से लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए शासन ने पहले ही इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा बृहस्पतिवार को पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए कि कहीं भी चीनी मांझे की बिक्री न होने पाए। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि चीनी मांझे से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो न सिर्फ आरोपी बल्कि इसे बेचने वाले दुकानदार पर भी हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के बाद एसएसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को सघन चेकिंग अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में दुकानदार खुलेआम प्रतिबंध को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं।

बृहस्पतिवार अपराह्न करीब दो बजे छह सड़का, घंटाघर और बड़े बाजार क्षेत्र की पतंग व मांझा दुकानों की पड़ताल की गई। दुकानों के बाहर पतंगें और सामान्य देसी मांझा सजा हुआ था। दुकानदार चीनी मांझा बेचने से इनकार करते दिखे, लेकिन जिन ग्राहकों को मांझा दिया गया, वह चीनी मांझा होने की आशंका जताई गई। बड़े बाजार में एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है, इसलिए उसे छिपाकर बेचना पड़ता है। पकड़े जाने पर कार्रवाई की जानकारी उन्हें है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चीनी मांझा सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पतंगबाजों और राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। इससे गर्दन कटने, गंभीर रूप से घायल होने और पक्षियों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, शहर में चीनी मांझे के केवल दो थोक विक्रेता बताए जा रहे हैं। थोक विक्रेताओं के मुताबिक, एक डिब्बे में चीनी मांझे की 28 चकरियां होती हैं, जिसकी कीमत करीब 700 रुपये है। इस हिसाब से एक चकरी की कीमत लगभग 25 रुपये पड़ती है, जबकि फुटकर बाजार में इसे 35 रुपये तक बेचा जाता है।

देसी और चीनी मांझे में बड़ा अंतर बताया जाता है। देसी मांझा सूती धागे पर चावल और गोंद के लेप से बनाया जाता है, जिसमें सीमित मात्रा में कांच मिलाया जाता है। वहीं चीनी मांझा नायलॉन और प्लास्टिक के धागे से तैयार होता है, जिसमें रसायन और महीन कांच मिलाया जाता है। यह बेहद मजबूत और धारदार होता है, जिससे पेड़ों, बिजली तारों और पक्षियों के साथ-साथ इंसानों की जान को भी गंभीर खतरा रहता है।

इस संबंध में एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि जिले में चीनी मांझे की बिक्री की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। शासन के आदेशों के अनुपालन में सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पतंग और मांझे की दुकानों की जांच कराएं। कहीं भी प्रतिबंधित चीनी मांझा मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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