फर्जीवाड़े की इमारत पर चला कानून का डंडा
70 करोड़ की कुर्क जमीन वापस
गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई लाई रंग
कुख्यात माफिया अनुपम दुबे पर बड़ा प्रहार
डीएम कोर्ट का सख्त फैसला, फर्जी आदेशों से कब्जाई गई जमीन को बताया ‘हनुमान जी महाराज’ की संपत्ति
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। वर्षों से माफिया कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जाल में फंसी श्री हनुमान जी महाराज विराजमान मंदिर ट्रस्ट की बहुमूल्य जमीन आखिरकार प्रशासनिक और न्यायिक सख्ती के बाद वापस मिल गई है। करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की यह भूमि अब विधिवत रूप से ट्रस्ट के नाम दर्ज कराने का रास्ता साफ हो गया है।
मामला सदर तहसील क्षेत्र के गांव अर्राहपहाड़पुर स्थित 4.3810 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है, जिस पर राज्य स्तरीय माफिया अनुपम दुबे और उसके सहयोगियों ने फर्जी अदालती आदेशों व कूटरचित दस्तावेजों के जरिए कब्जा जमा लिया था। राजस्व अभिलेखों में दशकों तक इस जमीन का स्वामित्व इधर-उधर घुमाया जाता रहा, फर्जी खरीद-फरोख्त होती रही और करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया गया। प्रशासन की नींद तब टूटी जब मामला गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई तक पहुंचा।
पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने 15 मई 2023 को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए डीएम को भेजी आख्या में स्पष्ट किया कि अनुपम दुबे, रमेश चंद्र, अभिषेक, अनुराग सहित अन्य ने 1968 और 2004 के फर्जी न्यायिक आदेश तैयार कर श्री हनुमान जी महाराज विराजमान मंदिर ट्रस्ट की संपत्ति अपने नाम दर्ज कराई। इसके बाद इस जमीन को डा. प्रभात गुप्ता, राजीव रस्तोगी समेत कई लोगों को बेचकर करोड़ों रुपये की कमाई की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर 18 मई 2023 को प्रशासन ने संपत्ति कुर्क कर ली थी।
मंदिर ट्रस्ट की ओर से मुख्तारआम एकलव्य कुमार ने इस मामले में लंबी और सख्त कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि यह भूमि 1941 की पंजीकृत वसीयती ट्रस्ट डीड के अंतर्गत श्री हनुमान जी महाराज विराजमान की संपत्ति है और माफिया ने अधिकारियों से मिलीभगत कर राजस्व रिकार्ड में सुनियोजित हेराफेरी कराई। मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने 5 जनवरी 2026 के अपने आदेश में यह साफ-साफ कह दिया कि 10 नवंबर 2004 का आदेश, जिसके सहारे जमीन पर दावा किया जा रहा था, पूरी तरह फर्जी और शून्य है।
चकबंदी अधिकारी ने खतौनी और अभिलेखों के आधार पर जमीन को ट्रस्ट संपत्ति मानते हुए मूल खातेदार श्री हनुमान जी महाराज के नाम दर्ज करने का आदेश दिया और फर्जी आदेश को निरस्त कर दिया। डीएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जमीन खरीदने वाले लोगों ने यह कहकर बचाव करने की कोशिश की कि उन्होंने राजस्व रिकार्ड देखकर बैनामा कराया था, जबकि आरोपियों ने इसे विरासत में मिली संपत्ति बताया। अदालत ने इन सभी दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कहा कि जब मूल आदेश ही फर्जी है, तो उसके आधार पर किया गया कोई भी बैनामा या अधिकार वैध नहीं हो सकता।
वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार इस संपत्ति का मूल्यांकन 70 करोड़ 9 लाख 60 हजार रुपये आंका गया है, जबकि बाजार मूल्य इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है। डीएम ने पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार सदर को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला न सिर्फ मंदिर ट्रस्ट के लिए बड़ी राहत है, बल्कि जमीन माफियाओं के खिलाफ प्रशासनिक सख्ती और कानून के राज का भी स्पष्ट संदेश माना जा रहा






