नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और असंगठित क्षेत्र में बनी निरंतर गति के कारण देश के विनिर्माण क्षेत्र को आने वाले समय में मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और रोजगार सृजन के संकेत अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक हैं।
आरबीआई गवर्नर ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, लेकिन भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक झटकों के बावजूद लचीलापन दिखाया है। सेवा क्षेत्र, विनिर्माण और खपत आधारित गतिविधियों में निरंतरता बनी हुई है, जिससे समग्र आर्थिक विकास को समर्थन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत हुई हैं, निवेश गतिविधियों में धीरे-धीरे तेजी आ रही है और असंगठित क्षेत्र में उत्पादन की रफ्तार बनी हुई है, जो रोजगार और आय सृजन के लिए अहम है।
आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि आगे की मौद्रिक नीति संशोधित श्रृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति (महंगाई) आंकड़ों द्वारा निर्देशित होगी। इससे नीति निर्धारण में अधिक सटीकता आएगी और वास्तविक स्थिति के अनुरूप फैसले लिए जा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक का प्राथमिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन देना है। खाद्य और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद महंगाई को नियंत्रित दायरे में रखने के लिए आरबीआई सतर्क बना रहेगा।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान मौद्रिक नीति रुख विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है। रेपो रेट को स्थिर रखने से जहां उद्योगों और निवेशकों को नीति स्थिरता का संदेश जाता है, वहीं आम उपभोक्ताओं पर ब्याज दरों का अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ता।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतें, मानसून की स्थिति और घरेलू मांग जैसे कारकों पर लगातार नजर रखी जाएगी। इन्हीं आधारों पर भविष्य की नीतिगत दिशा तय की जाएगी।

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