– पूर्व में आरोपित डॉक्टर पी. कुजूर को राहत के बाद बढ़ी गतिविधियां, पुलिस निगरानी
यूथ इंडिया |
फर्रुखाबाद।धर्म परिवर्तन के एक चर्चित मामले में पुलिस द्वारा पूर्व में आरोपित किए गए डॉ. पी. कुजूर को हाल ही में राहत दिए जाने के बाद मामला फिर गरमाता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, राहत मिलते ही धर्म परिवर्तन से जुड़े इस गिरोह की गतिविधियां दोबारा तेज हो गई हैं और अब इसके तार सीधे गांवों तक जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।
गांव-गांव फैलाया जा रहा नेटवर्क
खोज में सामने आया है कि यह गिरोह अब शहरी सीमाओं से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पैठ बना रहा है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर ऐसे लोगों को माध्यम बनाया जा रहा है, जिन्हें गिरोह के अंदरूनी हलकों में ‘कामरेड़े’ कहा जा रहा है। यही लोग गांवों में संपर्क साधने, जरूरतमंदों की पहचान करने और उन्हें प्रभाव में लेने की भूमिका निभा रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि गिरोह आर्थिक सहायता, इलाज, शिक्षा और रोजगार जैसे प्रलोभनों के जरिए लोगों को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर रहा है। कुछ मामलों में सामाजिक दबाव और मानसिक प्रभाव डालने की शिकायतें भी सामने आई हैं। गांवों में चुपचाप बैठकों और निजी संवादों के जरिए गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टर पी. कुजूर को पुलिस स्तर पर राहत मिलने के बाद गिरोह का मनोबल बढ़ा है। पहले जहां गतिविधियां सीमित और छिपी हुई थीं, अब वही काम अधिक संगठित और खुले तौर पर किए जाने की चर्चा है।
मामले ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एक बार आरोपित रह चुका व्यक्ति और उससे जुड़ा नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में सतत निगरानी और खुफिया तंत्र की सक्रियता बेहद जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों की बढ़ती चर्चा के बीच यह मांग तेज हो रही है कि प्रशासन ऐसे नेटवर्क पर कड़ी नजर रखे और कानून के दायरे में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था बनी रहे।

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