मोटी रकम लेकर की जा रही डीएनसी
फर्रुखाबाद। जनपद में बीते दिनों सामने आए भ्रूण हत्या के दो मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अवैध रूप से चल रहे झोलाछाप चिकित्सकों की गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है। खास बात यह है कि इस पूरे अवैध नेटवर्क में अल्ट्रासाउंड संचालकों की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार मसेनी चौराहा क्षेत्र में झोलाछाप चिकित्सकों की भरमार है, जो खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रूप से इलाज और गर्भपात जैसे गंभीर कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि मोटी रकम लेकर डीएनसी (गर्भपात) कर दी जाती है और इसके बाद नवजात शिशु अथवा भ्रूण के शव को कूड़े के ढेर में फेंक दिया जाता है, जिससे मानवता भी शर्मसार हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध बिना लिंग परीक्षण के संभव नहीं हैं। ऐसे में अल्ट्रासाउंड संचालकों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। नियमों के अनुसार अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर सख्त निगरानी और नियमित जांच होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कई केंद्र बिना पंजीकरण या तय मानकों के विपरीत संचालित हो रहे हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दो-दो भ्रूण हत्या के मामले सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या सख्ती देखने को नहीं मिली है। न तो झोलाछाप चिकित्सकों पर प्रभावी छापेमारी हुई और न ही संदिग्ध अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की गई। इससे विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों को तत्काल सील किया जाए और भ्रूण हत्या में संलिप्त झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ऐसे अमानवीय कृत्यों पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
भ्रूण हत्या के दो मामले उजागर, झोलाछाप चिकित्सकों और अल्ट्रासाउंड संचालकों की पौबारा


