नई दिल्ली। अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनियों से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश पारित करते हुए जांच एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा है कि वे इस पूरे मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र और तटस्थ तरीके से जांच करें। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई या पक्षपात स्वीकार्य नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सीबीआई और ईडी पहले ही इस मामले में समय की मांग कर चुकी हैं। ऐसे में अब दोनों जांच एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और जवाब अदालत में दाखिल करना होगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एडीएजी समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कथित बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपों की जांच में एजेंसियां पहले ही काफी समय ले चुकी हैं, इसलिए अब मामले में स्पष्ट स्थिति सामने आनी चाहिए।
अदालत ने सीबीआई और ईडी से यह भी पूछा है कि अब तक जांच में क्या प्रगति हुई है, किन बिंदुओं पर कार्रवाई की गई है और आगे की जांच की क्या दिशा होगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और एडीएजी समूह की कंपनियों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि सार्वजनिक बैंकों से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामलों का सीधा असर आम जनता और वित्तीय व्यवस्था पर पड़ता है, इसलिए ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अदालत के इस आदेश के बाद माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में एडीएजी से जुड़े इस मामले में जांच की दिशा और तेज हो सकती है।
अब सबकी निगाहें चार सप्ताह बाद अदालत में दाखिल होने वाली सीबीआई, ईडी और एडीएजी की रिपोर्टों पर टिकी हैं, जिनके आधार पर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई और सुनवाई की रूपरेखा तय करेगा।

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