— लगातार दो दिन मिले नवजात शव, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल, साठ–गांठ से सरकार की किरकिरी
फर्रुखाबाद। शहर में भ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात का अमानवीय गोरखधंधा खुलेआम फल-फूल रहा है। मशीनी चौराहा क्षेत्र में लगातार दो दिनों तक नवजात शिशुओं के शव मिलने की घटनाओं ने न केवल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं से यह साफ हो गया है कि कार्रवाई के दावों के बावजूद यह अवैध धंधा बेखौफ जारी है।
सूत्रों के अनुसार मशीनी चौराहा क्षेत्र के कुछ निजी नर्सिंग होम और कथित अस्पतालों में नियमों को ताक पर रखकर अवैध गर्भपात और भ्रूण हत्या कराई जा रही है। आरोप है कि मनचाहा धन लेकर झोलाछाप चिकित्सक और कुछ अस्पताल संचालक इस संगीन अपराध को अंजाम दे रहे हैं। लगातार शव मिलने की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है।
आरोपों के घेरे में सिद्धि विनायक हॉस्पिटल, श्री सिद्धिविनायक हॉस्पिटल, राम मूर्ति हॉस्पिटल और जयश हॉस्पिटल समेत कई निजी अस्पताल बताए जा रहे हैं। इन पर आरोप है कि न तो मानक पूरे किए जा रहे हैं और न ही वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
मामला केवल शहर तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह अवैध धंधा फैल चुका है। जानकारी के मुताबिक दाइयां घर-घर जाकर अवैध गर्भपात कराने का काम कर रही हैं, जिससे महिलाओं की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है और सामाजिक अपराध को बढ़ावा मिल रहा है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शहर में लंबे समय से दर्जनों अवैध अस्पताल संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठोस और निर्णायक कार्रवाई न होने से साठ–गांठ की आशंका गहराती जा रही है। यही कारण है कि अब यह मामला सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संभावित मिलीभगत का भी बनता जा रहा है, जिससे सरकार की भी किरकिरी हो रही है।
इस पूरे मामले पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने भ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात को निंदनीय अपराध बताते हुए सख्त कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर नवजात शिशुओं के शव मिले हैं, उनके 200 मीटर के दायरे में स्थित सभी अस्पतालों को नोटिस जारी किए जाएंगे। साथ ही अवैध गतिविधियों में संलिप्त दाइयों की पहचान भी की जा रही है। दोषी पाए जाने पर अस्पताल संचालकों और संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गौतम ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट मोड पर रखा गया है और जल्द ही विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, सवाल यह बना हुआ है कि जब यह गोरखधंधा लंबे समय से चल रहा था, तब तक विभाग की आंखें क्यों बंद रहीं।
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि यदि अब भी ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल, पूरे जिले की नजरें स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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