मंत्री स्वयं गांव देखने निकले और पहुंच गए थे डीएम ऑफिस
– विधायक उनकी गाड़ी में रहे
– डीएम कार्यालय तक पूरा कार्यक्रम मंत्री के निर्देश पर चला
महोबा (चरखारी) | यूथ इंडिया चरखारी में हर घर नल योजना को लेकर हुए घटनाक्रम पर उठ रहे सवालों के बीच यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया है कि जल संकट की स्थिति देखने के लिए जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र सिंह स्वयं गांव जाने को तैयार हुए थे। मंत्री के इस दौरे के दौरान चरखारी विधायक बृजभूषण सिंह राजपूत उनकी गाड़ी में मौजूद थे।
सूत्रों के अनुसार, गांव जाने का निर्णय, वहां पहुंचना और उसके बाद सीधे जिलाधिकारी कार्यालय तक जाना—यह पूरा कार्यक्रम मंत्री के स्तर से तय हुआ था। विधायक मंत्री के साथ थे, लेकिन न तो रूट तय करने में और न ही प्रशासनिक बैठकों के निर्णय में उनकी कोई स्वतंत्र भूमिका थी।
हंगामे वाले दिन मंत्री जिस गांव में हालात देखने गए, वहां विधायक उनके साथ मौजूद रहे। इसके बाद मंत्री किसी गांव में ना जाकर स्वयं जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। विधायक भी उसी काफिले और उसी वाहन में उनके साथ थे।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि,
गांव दौरे का निर्णय मंत्री का था
डीएम कार्यालय पहुंचने का निर्णय भी मंत्री का था,प्रधानों के साथ बैठक मंत्री की मौजूदगी में हुई।
इस बैठक के बाद ही मंत्री ने माना कि जल संकट वास्तविक है और 20 दिन में समाधान का आश्वासन दिया गया।
बैठक के बाद हालात ऐसे बने कि जिलाधिकारी को मीडिया के सामने आकर हर घर नल योजना और विकास कार्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। इस दौरान जल शक्ति मंत्री ने भी यह स्वीकार किया कि चरखारी और आसपास के गांवों में जलापूर्ति की समस्या है। तभी तो 20 दिन का आश्वासन दिया।
विधायक पहले से उठा रहे थे मुद्दा
विधायक बृजभूषण सिंह राजपूत का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से बुंदेलखंड में लड़खड़ा रही हर घर नल योजना को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने यह मुद्दा दो बार विधानसभा में भी उठाया, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ।
विधायक के अनुसार, जब समस्या लगातार बनी रही, तब मंत्री को जमीनी सच्चाई दिखाना जरूरी हो गया।
घटनाक्रम को लेकर विधायक का कहना है “मैं जल शक्ति मंत्री के साथ उनकी गाड़ी में था। गांव देखना, डीएम कार्यालय जाना यह सब मंत्री के कार्यक्रम का हिस्सा था। मेरा उद्देश्य सिर्फ जनता की समस्या सामने लाना था।”
विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की, बल्कि जनप्रतिनिधि होने के नाते अपनी जिम्मेदारी निभाई।
विधायक ने कहा कि नरेंद्र मोदी की हर घर नल योजना देश की महत्वाकांक्षी योजना है और उसका सही क्रियान्वयन कराना जनप्रतिनिधियों का दायित्व है।
चरखारी प्रकरण में यह तथ्य साफ है कि जल संकट की स्थिति देखने के लिए मंत्री स्वयं गांव गए, विधायक उनके साथ उनकी गाड़ी में मौजूद थे और उसके बाद मंत्री के निर्देश पर ही डीएम कार्यालय में बैठक हुई। यह घटनाक्रम अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर इस सवाल पर आ गया है कि 20 दिन के आश्वासन के बाद ज़मीन पर पानी पहुंचेगा या नहीं।

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