इस्लामाबाद: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान (Balochistan) प्रांत में सुरक्षा बलों ने रविवार को आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़े अभियान का नेतृत्व किया। सेना के अनुसार अलग-अलग मुठभेड़ों में कम से कम 92 आतंकवादी मारे गए, जबकि इस संघर्ष में 15 सैनिक शहीद हो गए। यह कार्रवाई शनिवार को जातीय बलूच समूहों से जुड़े आतंकियों द्वारा कई जगहों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई।
आतंकियों ने क्वेटा, ग्वादर, पंजगुर और पसनी सहित कई इलाकों में शांति भंग करने की कोशिश की थी। सुरक्षा बलों और पुलिस ने हाई अलर्ट पर रहते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और आतंकियों की साजिश को नाकाम कर दिया। सेना ने बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया और तीन आत्मघाती हमलावरों समेत 92 आतंकियों को मार गिराया। इन हमलों में आम लोगों को भी निशाना बनाया गया, जिससे महिलाओं, बच्चों और मजदूरों समेत 18 नागरिकों की मौत हुई।
पंजगुर और हरनाई जिलों में टीटीपी के 41 आतंकियों को समाप्त किया गया। पिछले दो दिनों में बलूचिस्तान में कुल 133 आतंकवादी खत्म किए जा चुके हैं। सेना ने स्पष्ट किया कि प्रभावित इलाकों में अभियान अभी भी जारी है और कायरतापूर्ण हमलों में शामिल लोगों व उनके मददगारों को कड़ी सजा दी जाएगी।
बलूचिस्तान में हाल के वर्षों में हिंसा में लगातार वृद्धि हुई है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में प्रांत में हिंसा से मरने वालों की संख्या 956 हो गई, जो पिछले वर्ष के 787 से लगभग 22 प्रतिशत ज्यादा है। इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक पाक इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, 2025 में पूरे पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं और हिंसा में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और देशभर में कुल 699 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई।
सेना ने बताया कि नेशनल एक्शन प्लान के तहत आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए यह अभियान तेज रफ्तार से जारी रहेगा। बलूचिस्तान में सक्रिय आतंकवादी समूहों को निशाना बनाकर सुरक्षा बलों ने इलाके में कानून और व्यवस्था बहाल करने का प्रयास किया।
सैन्य अधिकारियों ने कहा कि आतंकवादियों ने आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों पर भी हमला किया, लेकिन उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया गया। अभियान में इस्तेमाल की गई रणनीतियों और तकनीकों ने आतंकियों की हर चाल को बेअसर कर दिया।
सुरक्षा बलों के अनुसार, इस अभियान से प्रांत में आतंकवादियों के नेटवर्क और उनके छुपे ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कई हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है, जिससे आगामी हमलों की संभावना को भी कम किया गया।
स्थानीय प्रशासन और सेना ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और आवश्यक सहायता प्रदान की। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, ताकि प्रभावित इलाकों में सामान्य जीवन जल्दी बहाल किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी हिंसा का प्रमुख कारण अलगाववादी और आतंकवादी समूहों की सक्रियता है। इस अभियान से प्रांत में अल्पकालिक स्थिरता तो आएगी, लेकिन लंबे समय तक स्थायी शांति के लिए निरंतर निगरानी और सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
पाकिस्तानी मीडिया ने इस अभियान को व्यापक कवरेज दिया और इसे सुरक्षा बलों की तत्परता और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के रूप में पेश किया। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ भी इसे पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा कदम मान रहे हैं।
इस अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया कि बलूचिस्तान में आतंकवाद और हिंसा के मामलों में पाकिस्तान की सेना पूरी गंभीरता और रणनीति के साथ कदम उठा रही है। आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे, ताकि प्रांत में कानून और व्यवस्था कायम रहे और आम नागरिक सुरक्षित महसूस करें।


