लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी (Unemployment in UP) गंभीर समस्या बनती जा रही है। सरकारी और विभिन्न सर्वे रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदेश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, लेकिन बड़ी संख्या में युवा रोजगार (youth employment) से वंचित हैं। देश के सबसे बड़े राज्य में नौकरी आज युवाओं का सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है।
उत्तर प्रदेश की अनुमानित आबादी करीब 27 करोड़ है। इनमें से लगभग 16 करोड़ युवा कार्यशील आयु वर्ग में आते हैं। प्रदेश का कुल श्रमबल लगभग 9 से 10 करोड़ माना जाता है, जिसमें से 2.5 से 3 करोड़ युवा बेरोजगार बताए जा रहे हैं। बेरोजगारी की दर कई बार राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है।
प्रदेश में हर साल 30 लाख से अधिक युवा स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी करते हैं, जबकि सरकारी और निजी क्षेत्र में नई नौकरियों की संख्या सीमित है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सालाना 5 से 7 लाख के आसपास ही रोजगार के अवसर पैदा हो पा रहे हैं। इससे लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने को मजबूर हैं।
भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, परीक्षाएं रद्द होने और नियुक्ति प्रक्रिया के लंबित रहने से युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। कई अभ्यर्थी वर्षों तक चयन सूची में नाम आने का इंतजार करते रहते हैं। उम्र सीमा पार होने के कारण कई युवाओं का भविष्य अधर में लटक जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी चिंताजनक है। उत्तर प्रदेश की लगभग 77 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जहां खेती ही मुख्य रोजगार का साधन है। बढ़ती लागत और कम आय के कारण कृषि युवाओं के लिए आकर्षक नहीं रह गई है। मनरेगा जैसे कार्यक्रम स्थायी रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
सरकार स्टार्टअप, स्किल ट्रेनिंग और निवेश के माध्यम से रोजगार सृजन का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर युवाओं को स्थायी और सुरक्षित नौकरी नहीं मिल पा रही है। निजी क्षेत्र में भी ठेका और अस्थायी रोजगार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के युवाओं का कहना है कि डिग्री और प्रशिक्षण के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच बेरोजगारी ने युवाओं और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।


