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Sunday, February 1, 2026

चरखारी की सियासी भिड़ंत: मंत्री बनाम विधायक और सत्ता के भीतर उठा तूफान, और रिमोट कंट्रोल!

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शरद कटियार

महोबा जनपद की चरखारी विधानसभा (Charkhari Assembly) अचानक उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे गर्म केंद्र बन गई है। एक ही दल के वरिष्ठ मंत्री और विधायक के बीच खुले टकराव ने न सिर्फ स्थानीय राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसा तूफान उठाया कि चरखारी का नाम लखनऊ से लेकर दिल्ली तक गूंजने लगा।

घटना के बाद जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह यह थी कि यह विवाद बंद कमरों तक सीमित नहीं रहा। आरोप–प्रत्यारोप, तीखे बयान, समर्थकों की बयानबाज़ी, सुरक्षा कर्मियों की आपस में जूतम पैजार और वायरल वीडियो ने इस झगड़े को सत्ता के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों और गद्दी का प्रतीक बना दिया। सवाल सिर्फ व्यक्तिगत टकराव का नहीं रहा, बल्कि यह पूछा जाने लगा कि क्या सरकार के भीतर ही अनुशासन ढीला पड़ चुका है? या फिर रिमोट कंट्रोल कहीं और है! जिसके चलते जिम्मेदार सब कुछ जानकार भी चुप हैं।

चरखारी का यह विवाद दरअसल उस संघर्ष को उजागर करता है, जो अक्सर सत्ता में रहते हुए दिखाई देता है मंत्री की प्रशासनिक ताकत बनाम विधायक की क्षेत्रीय पकड़। दोनों अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र को लेकर आमने-सामने आ गए और मामला इतना बढ़ा कि सार्वजनिक मंच तक पहुंच गया। यह टकराव बता गया कि सत्ता के शीर्ष पर दिखने वाली एकजुटता के पीछे स्थानीय स्तर पर कितनी गहरी खींचतान चल रही है।

मीडिया ने दी आग, सोशल मीडिया ने फैलाया धमाका, टीवी चैनलों ने इसे “सत्ता की अंदरूनी कलह” बताया, तो सोशल मीडिया पर यह मामला कुछ ही घंटों में ट्रेंड करने लगा।

वीडियो क्लिप्स वायरल हुईं

समर्थकों ने खुलकर मोर्चा संभाला

विपक्ष को बैठे-बिठाए हमला करने का मौका मिल गया।

चरखारी अब सिर्फ एक विधानसभा नहीं रही, बल्कि राजनीतिक तमाशे का केंद्र बन गई। इस झगड़े ने विपक्ष को यह कहने का अवसर दे दिया कि “सरकार अपने ही घर को नहीं संभाल पा रही।” वहीं सत्तारूढ़ दल के लिए यह मामला अनुशासन और नियंत्रण की परीक्षा बन गया है। अगर ऐसे विवादों पर समय रहते लगाम नहीं लगी, तो इसका असर 2027 की चुनावी जमीन पर साफ दिख सकता है।

असली सवाल जनता का

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल जनता पूछ रही है— विकास कहां है?सड़क, पानी, रोजगार जैसे मुद्दे कहां गए?सत्ता की लड़ाई में आम आदमी क्यों पिस रहा है?चरखारी की सियासी भिड़ंत ने यह साफ कर दिया है कि जब सत्ता के भीतर संतुलन बिगड़ता है, तो उसका शोर जनता तक पहुंचता है, लेकिन समाधान नहीं।

महोबा की चरखारी विधानसभा में हुआ मंत्री–विधायक विवाद केवल एक झगड़ा नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर चल रही खींचतान का संकेत है। मीडिया और सोशल मीडिया पर मचा यह धमाल बताता है कि राजनीति अब सिर्फ फैसलों से नहीं, बल्कि वायरल कंटेंट और सार्वजनिक टकराव से भी संचालित हो रही है।अब देखना यह है कि सरकार इस आग को अनुशासन से बुझाती है, या यह चिंगारी आगे चलकर बड़ा राजनीतिक संकट बन जाती है।

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