शरद कटियार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट 2026–27 सरकार की उस आर्थिक सोच को सामने रखता है, जिसमें तात्कालिक राहत की जगह दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दी गई है। करीब 85 मिनट के बजट भाषण में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल इंडिया और निवेश जैसे क्षेत्रों पर जोर दिखा, लेकिन आम आदमी की जेब को तुरंत हल्का करने वाले फैसलों का अभाव साफ नजर आया।
सबसे पहले मध्यम वर्ग की बात करें। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होने से यह वर्ग निराश हुआ। सरकार ने रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाकर प्रक्रियागत सहूलियत जरूर दी, लेकिन यह राहत कर बोझ घटाने जैसी नहीं है। महंगाई, ईएमआई और रोजमर्रा के खर्च से जूझ रहे परिवारों को जिस प्रत्यक्ष राहत की उम्मीद थी, वह इस बजट में नहीं दिखी।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर सरकार ने बड़े सपने रखे हैं—7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, नए जल मार्ग, और शहरी विकास के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय। यह सब भविष्य की तस्वीर तो खींचता है, लेकिन सवाल यही है कि इन परियोजनाओं का लाभ आम नागरिक तक कितनी जल्दी पहुंचेगा। वर्तमान आर्थिक दबाव झेल रही जनता के लिए “लंबे समय का फायदा” तात्कालिक संकट का समाधान नहीं बन पाता।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट अपेक्षाकृत सकारात्मक रहा। कैंसर सहित गंभीर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने, नए मेडिकल हब और आयुर्वेदिक संस्थानों की घोषणा ने हेल्थ सेक्टर की सराहना बटोरी। शिक्षा और कौशल विकास में कंटेंट क्रिएटर लैब, कॉलेजों–स्कूलों में डिजिटल पहल और महिला छात्रावासों का प्रस्ताव भविष्य की जरूरतों के अनुरूप है। हालांकि इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रोजगार के ठोस अवसर कितनी तेजी से बनते हैं।
कांग्रेस ने बजट को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बजट को “पूरी तरह फीका” करार देते हुए कहा कि इसमें महंगाई, बेरोजगारी और मध्यम वर्ग की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। कांग्रेस का तर्क है कि सरकार ने कॉर्पोरेट और बड़े निवेश पर जोर दिया, जबकि आम आदमी के लिए कोई ठोस राहत नहीं दी गई।
समाजवादी पार्टी का हमला,‘बड़े लोगों की खुशहाली का दस्तावेज़’
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट को पहले से तय लाभार्थियों के लिए बनाया गया बताते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आलू किसान, बुजुर्गों की पेंशन और युवाओं के रोजगार के लिए इस बजट में क्या है।
अखिलेश यादव ने स्मार्ट सिटी और विकसित भारत के दावों पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि गंदा पानी और महंगी बिजली जमीनी हकीकत हैं। उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को विकास के नाम पर बड़े दावे तो मिले, लेकिन ठोस लाभ नहीं।
बजट 2026 को देखकर साफ है कि सरकार ने आज की राहत से ज्यादा कल की तैयारी को चुना है। इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश भविष्य के लिए जरूरी हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनता का सवाल जायज है जब आज का बोझ भारी है, तो कल के सपनों तक पहुंचने का रास्ता कौन आसान करेगा?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि राजनीतिक बहस अब इस सवाल पर केंद्रित होगी कि यह बजट विकास का संतुलित रोडमैप है या आम जनता से दूरी का संकेत। इसका असली जवाब आने वाले महीनों में जमीन पर दिखने वाले असर से ही मिलेगा।

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