डॉ विजय गर्ग
हर साल लाखों विद्यार्थी नीट यूजी और जेईई की तैयारी में अपना किशोरावस्था और युवावस्था का बड़ा हिस्सा लगा देते हैं। कोचिंग सेंटर, मॉक टेस्ट, रैंक, कट-ऑफ—सब कुछ जीवन का केंद्र बन जाता है। सफलता मिली तो जश्न, नहीं मिली तो आत्मग्लानि। लेकिन एक जरूरी सवाल अक्सर अनसुना रह जाता है—क्या जीवन केवल नीट या जेईई तक ही सीमित है?

सच यह है कि ये परीक्षाएँ करियर के एक रास्ते खोलती हैं, पूरा भविष्य तय नहीं करतीं। भारत जैसे विशाल और विविध देश में प्रतिभा के लिए अवसरों की कमी नहीं है, कमी है तो जानकारी और दृष्टि की। विज्ञान, तकनीक और चिकित्सा के अलावा भी ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहाँ जुनून, कौशल और निरंतर सीखने से सार्थक और सम्मानजनक जीवन बनाया जा सकता है।

आज के समय में बेसिक साइंस, डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, पर्यावरण अध्ययन, डिज़ाइन, आर्किटेक्चर, लॉ, इकोनॉमिक्स, पब्लिक पॉलिसी, जर्नलिज़्म, एजुकेशन, साइंस कम्युनिकेशन और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्र तेज़ी से उभर रहे हैं। कई बार ये क्षेत्र व्यक्ति की रुचि और स्वभाव से ज़्यादा मेल खाते हैं, जिससे काम बोझ नहीं, आनंद बन जाता है।

नीट/जेईई की तैयारी अपने आप में व्यर्थ नहीं है। यह अनुशासन, परिश्रम और धैर्य सिखाती है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब परीक्षा का परिणाम व्यक्ति के आत्म-मूल्य से जोड़ दिया जाता है। असफलता को अयोग्यता मान लेना सबसे बड़ा भ्रम है। इतिहास गवाह है—कई महान वैज्ञानिक, लेखक, उद्यमी और शिक्षक पारंपरिक “टॉपर” नहीं थे।

माता-पिता और समाज की भूमिका यहाँ निर्णायक है। बच्चों को एक ही फ्रेम में फिट करने के बजाय उनकी रुचियों को पहचानना और विकल्पों की जानकारी देना ज़रूरी है। करियर एक मैरेथन है, सौ मीटर की दौड़ नहीं। रास्ते बदलते हैं, लक्ष्य परिभाषित होते रहते हैं।

नीट–जेईई से आगे सोचने का अर्थ है—
रैंक से आगे सीखना,
डिग्री से आगे कौशल,
और तुलना से आगे आत्मविश्वास।

अंततः सफलता वही है, जहाँ व्यक्ति न सिर्फ़ अच्छा कमा सके, बल्कि सार्थक योगदान दे सके और मानसिक रूप से संतुलित रह सके। परीक्षा एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं। जीवन की किताब का यह सिर्फ़ एक अध्याय है—पूरी कहानी अभी बाकी है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

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