– के बीच उभरी नई शक्ति
चरखारी विधायक ब्रजभूषण सिंह राजपूत
– बने बुंदेलखंड की नई सियासी पहचान
महोबा।बुंदेलखंड की राजनीति लंबे समय तक कल्याण महासभा की सामाजिक ताकत और पूर्व सांसद गंगा चरण सिंह की जमीनी राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती रही है। एक ओर समाज को संगठित करने वाली महासभा का प्रभाव रहा, तो दूसरी ओर गांव-गांव पकड़ रखने वाले गंगा चरण सिंह जैसे नेताओं की अलग पहचान बनी। अब इसी राजनीतिक विरासत और सामाजिक ताकत के बीच एक नई शक्ति के रूप में चरखारी विधायक ब्रजभूषण सिंह राजपूत उभरकर सामने आए हैं।
चरखारी विधानसभा से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए ब्रजभूषण सिंह राजपूत ने हाल के दिनों में जिस तरह जनसमस्याओं को लेकर खुलकर मोर्चा संभाला है, उसने उन्हें केवल एक विधायक नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ के रूप में स्थापित कर दिया है। अपनी ही सरकार और मंत्री के सामने सड़कों पर खड़े होकर सवाल उठाना आसान नहीं होता, लेकिन ब्रजभूषण सिंह राजपूत ने यही जोखिम उठाकर अलग पहचान बनाई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जहां कल्याण महासभा सामाजिक एकजुटता की ताकत रही है और गंगा चरण सिंह की राजनीति जमीन से जुड़ी रही, वहीं ब्रजभूषण सिंह राजपूत इन दोनों धाराओं को जोड़ते हुए नई पीढ़ी की आक्रामक और जनपक्षधर राजनीति का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यही वजह है कि बुंदेलखंड में उन्हें सिर्फ पार्टी के नेता के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय नेतृत्व के उभरते चेहरे के तौर पर देखा जाने लगा है।
ग्रामीण विकास, जल जीवन मिशन, टूटी सड़कें और प्रशासनिक उदासीनता जैसे मुद्दों पर खुलकर बोलना उन्हें पारंपरिक राजनीति से अलग खड़ा करता है। खासकर लोधी समाज में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, जहां उन्हें गंगा चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का स्वाभाविक उत्तराधिकारी भी माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, बुंदेलखंड की राजनीति अब केवल अतीत की ताकतों तक सीमित नहीं रह गई है। कल्याण महासभा की सामाजिक शक्ति, गंगा चरण सिंह की जमीनी राजनीति और चरखारी विधायक ब्रजभूषण सिंह राजपूत की मुखर भूमिका—इन तीनों के संगम से एक नई राजनीतिक धारा आकार लेती दिख रही है, जो आने वाले समय में क्षेत्र की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।






