तनाव, हार्मोन असंतुलन और गलत जीवनशैली हैं प्रमुख कारण
यूथ इंडिया
आज के समय में पुरुषों और महिलाओं दोनों में गुप्त रोगों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। गलत खानपान, तनावपूर्ण जीवन, शारीरिक निष्क्रियता और झिझक के कारण लोग समय पर इलाज नहीं करवा पाते, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं के साथ-साथ योग गुप्त रोगों से राहत और रोकथाम में एक प्राकृतिक व सुरक्षित उपाय है।
गुप्त रोग क्यों होते हैं
चिकित्सकीय और योग विशेषज्ञों के अनुसार गुप्त रोगों के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं—
अत्यधिक मानसिक तनाव और चिंता,हार्मोनल असंतुलन,अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी,गलत खानपान और नशे की आदत,शारीरिक कमजोरी और रक्तसंचार की कमी को दूर कर
योग शरीर के आंतरिक अंगों को सक्रिय कर इन कारणों को जड़ से सुधारने में मदद करता है।
गुप्त रोगों में लाभकारी योगासन
बद्धकोणासन:यह आसन जननांगों और श्रोणि क्षेत्र में रक्तसंचार बढ़ाता है। पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए उपयोगी माना जाता है।
भुजंगासन:इससे रीढ़ और पेट के अंग सक्रिय होते हैं, जिससे हार्मोन संतुलन बेहतर होता है।
वज्रासन:पाचन सुधारने के साथ-साथ यह शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखता है, जो गुप्त रोगों में सहायक है।
शलभासन:यह आसन निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करता है और कमजोरी दूर करने में मदद करता है।
अनुलोम-विलोम:यह प्राणायाम तनाव कम करता है और हार्मोन संतुलन में मदद करता है, जो गुप्त रोगों के उपचार में आवश्यक है।
भ्रामरी प्राणायाम:मानसिक शांति प्रदान करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
कपालभाति:शरीर से विषैले तत्व निकालकर पाचन और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार केवल योग ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार भी अनिवार्य हैसंतुलित और पौष्टिक आहार,
नशे से दूरी,नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद,स्वच्छता और संयमित दिनचर्या,समस्या को छिपाने के बजाय समय पर परामर्श
कितने समय में दिखता है असर
नियमित योग अभ्यास से 4 से 8 सप्ताह में शरीर में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगता है। लंबे समय तक अभ्यास करने पर गुप्त रोगों से संबंधित समस्याओं में काफी हद तक राहत मिल सकती है।
गुप्त रोग कोई लज्जा की बात नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। योग के माध्यम से न केवल इन रोगों से राहत मिलती है, बल्कि शरीर और मन दोनों को मजबूती भी मिलती है। नियमित योग अभ्यास, सही जीवनशैली और समय पर मार्गदर्शन अपनाकर गुप्त रोगों से प्रभावी रूप से बचाव संभव है।

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