सौरभ टंडन
भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है। आंकड़े बताते हैं कि देश की आधी से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है, लेकिन यह जनसांख्यिकीय लाभ (डेमोग्राफ़िक डिवाइडड) तभी ताकत बनेगा, जब यह युवा ऊर्जा सही दिशा, अवसर और सम्मान पाए। आज का युवा केवल नौकरी की तलाश में नहीं है, वह अपनी पहचान, आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य की खोज में है।
हजारों-लाखों युवा हर साल डिग्री लेकर कॉलेजों से निकलते हैं। इंजीनियर, ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट—सब कुछ है, लेकिन अवसर सीमित हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की भीड़ हर साल बढ़ती जा रही है, जबकि नौकरियां घटती या अनिश्चित होती जा रही हैं। कभी पेपर लीक, कभी भर्ती रद्द, कभी नियम बदल—इन सबने युवाओं के भीतर एक स्थायी असुरक्षा पैदा कर दी है।
अब करियर केवल मेहनत और योग्यता का सवाल नहीं रह गया, बल्कि लंबे इंतजार और मानसिक सहनशीलता की परीक्षा बन चुका है।
सोशल मीडिया ने युवाओं को अभिव्यक्ति का मंच जरूर दिया है, लेकिन साथ ही एक अदृश्य दबाव भी पैदा किया है। हर तरफ सफलता की चमक दिखाई देती है—कोई विदेश में है, कोई स्टार्टअप शुरू कर चुका है, कोई लाखों कमा रहा है। इस चमक के बीच संघर्षरत युवा खुद को असफल मानने लगता है।
आत्मविश्वास को धीरे-धीरे खोखला कर देती है। युवा यह भूल जाता है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली सफलता अक्सर अधूरी सच्चाई होती है।
लगातार दबाव, अनिश्चित भविष्य और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच युवा मानसिक रूप से थकने लगा है। चिंता, अवसाद और आत्म-संदेह अब व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक संकट बनते जा रहे हैं। दुर्भाग्य यह है कि आज भी मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना कमजोरी समझा जाता है।जब युवा टूटता है, तो उसका असर केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश की उत्पादकता पर पड़ता है।
नीतियों में युवा, सिर्फ़ संख्या नहीं
जरूरत है कि नीति-निर्माता युवाओं को केवल आंकड़ों या वोट बैंक के रूप में न देखें, बल्कि इंसान के रूप में समझें।
स्किल आधारित रोजगार को प्राथमिकता मिले,
स्टार्टअप और स्वरोजगार के लिए ज़मीनी सपोर्ट हो,
परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाएं पारदर्शी हों,और मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा व रोजगार नीति का हिस्सा बनाया जाए,युवा को केवल “एडजस्ट करना सीखो” नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का भरोसा चाहिए।
भारत की रफ्तार उसके युवाओं से है। अगर यही युवा हताश, थका और दिशाहीन हो गया, तो विकास की सारी योजनाएं खोखली साबित होंगी। आज जरूरत है भरोसे की, संवाद की और ऐसे अवसरों की, जहां युवा केवल नौकरी नहीं, अपनी पहचान गढ़ सके।
क्योंकि जब युवा मजबूत होता है, तभी राष्ट्र मजबूत होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here