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Thursday, January 29, 2026

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता, चुनाव से पहले कार्रवाई की मांग

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बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। सांप्रदायिक हिंसा और उत्पीड़न के मामलों के बीच, बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBC) के अध्यक्ष नीम चंद्र भौमिक ने सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। भौमिक ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय आगामी चुनाव में भाग लेना चाहता है, लेकिन इसके लिए एक अनुकूल और सुरक्षित माहौल होना अनिवार्य है।

भौमिक ने कहा कि राजनीतिक दलों को केवल मुक्ति युद्ध के प्रतीकात्मक समर्थन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को व्यवहार में दिखाना चाहिए। उन्होंने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुए अत्याचारों पर कार्रवाई अनिवार्य ठहराई और स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा विश्वसनीय चुनाव की दोहराई। उनका कहना है कि बांग्लादेश का धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक संविधान 1972 में मुक्ति युद्ध के मूल्यों – समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय – पर आधारित था।

अल्पसंख्यकों पर हो रहे उत्पीड़न के मामलों को उजागर करते हुए भौमिक ने सरकार की उदासीनता पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि अब तक इन शिकायतों की जांच के लिए कोई आयोग गठित नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि 1971 में देश में अल्पसंख्यकों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत थी, जबकि अब सरकार इसे केवल 10 प्रतिशत बताती है। इस गिरावट का कारण बड़े पैमाने पर भेदभाव, उत्पीड़न और अत्याचारों के कारण हुए पलायन हैं, जिसे सरकार स्वीकार करने से बच रही है।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा का आंशिक ब्यौरा भी प्रस्तुत किया। इस अवधि में कुल 522 हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 61 हत्या की घटनाओं में 66 लोगों की मौत हुई। महिलाओं के खिलाफ 28 हिंसा की घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामले शामिल हैं।

इसके अलावा, पूजा स्थलों पर हमले, मूर्ति तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की 95 घटनाएं, पूजा स्थलों की भूमि पर कब्जे की 21 घटनाएं, घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हमलों की 102 घटनाएं, अपहरण और जबरन वसूली की 38 घटनाएं, जान से मारने की धमकी और यातना की 47 घटनाएं और कथित धार्मिक निंदा के आरोपों में 36 गिरफ्तारी और यातना के मामले दर्ज किए गए।

परिषद ने अपने बयान में अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह सांप्रदायिकता की “नई और सीमित परिभाषा” बनाने की कोशिश कर रही है। सरकार केवल मंदिरों या पूजा स्थलों में हुई हिंसा को ही सांप्रदायिक मानती है, जबकि समाज और राज्य में होने वाली अन्य घटनाओं को नजरअंदाज कर देती है। उन्होंने कहा कि 173 मौतों में से केवल एक को ही सरकार ने सांप्रदायिक हत्या माना और 58 हिंदू महिलाओं के साथ हुए बलात्कार को भी गैर-सांप्रदायिक करार दिया। परिषद ने इसे ‘बेतुका’ बताते हुए कड़ी निंदा की।

चुनाव से पहले परिषद ने चुनाव आयोग से निष्पक्ष और सकारात्मक माहौल सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक मतदाता डर मुक्त होकर मतदान केंद्रों तक पहुंच सकें।

साथ ही परिषद ने चुनाव प्रचार में धर्म और सांप्रदायिकता के इस्तेमाल पर रोक लगाने, धार्मिक स्थलों के राजनीतिक उपयोग को प्रतिबंधित करने और धार्मिक घृणा फैलाने वाले भाषण, झूठी अफवाहों और दुष्प्रचार को दंडनीय अपराध घोषित करने की भी मांग की है।

भौमिक ने चेतावनी दी कि यदि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह न केवल लोकतंत्र पर चोट होगी, बल्कि समाज में व्यापक असुरक्षा और भय का माहौल पैदा होगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और प्रशासन से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।

सर्वेक्षण और रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित माहौल बनाए रखना बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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