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Thursday, January 29, 2026

68 की उम्र में कैसे सनी देओल बने सिनेमा के नए सुपरस्टार

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मुंबई: सनी देवल,68 वर्ष की उम्र में जहां कई कलाकार पर्दे से दूर हो जाते हैं, वहीं सनी देओल (Sunny Deol) आज भी बड़े-बड़े सितारों को पीछे छोड़ते हुए बॉक्स ऑफिस पर दमदार मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। यह महज संयोग नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, दर्शकों से गहरे जुड़ाव और सही समय पर सही सिनेमा चुनने का नतीजा है। सनी देओल का करियर किसी रोलर कोस्टर से कम नहीं रहा। एक दौर था जब वह हिंदी सिनेमा (hindi cinema) के सबसे भरोसेमंद एक्शन स्टार माने जाते थे। फिर वक्त

बदला, सिनेमा की भाषा बदली और कुछ समय के लिए वह मुख्यधारा से दूर भी हुए। लेकिन सनी देओल ने कभी खुद को खत्म नहीं माना। उन्होंने इंतजार किया—सही कहानी, सही किरदार और सही मौके का।जनता से जुड़ा ‘देसी हीरो’ इमेज सनी देओल की सबसे बड़ी ताकत उनकी देसी, जमीन से जुड़ी छवि है। गुस्से से भरी आंखें भारी आवाज अन्याय के खिलाफ खड़ा आम आदमीbआज भी दर्शक उन्हें स्क्रीन पर उसी उम्मीद से देखते हैं—कि सनी आएंगे और इंसाफ दिलाएंगे। यही वजह है कि उनकी फिल्मों को देखने सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि परिवार और कस्बाई दर्शक भी सिनेमाघरों तक पहुंचते है।

68 साल की उम्र में भी सनी देओल का एक्शन दर्शकों को रोमांचित करता है। फर्क बस इतना है कि अब यह एक्शन शोर से ज्यादा असरदार है। उनकी मौजूदगी ही सीन को भारी बना देती है। संवाद कम हों, लेकिन जब बोलते हैं तो तालियां अपने आप बज जाती हैं। आज के दौर में जहां तकनीक और वीएफएक्स हावी है, वहीं सनी देओल का एक्शन भावनाओं और भरोसे पर टिका है।

आज हिंदी सिनेमा में स्टारडम बंट चुका है। सोशल मीडिया फॉलोअर्स, ब्रांड वैल्यू और ओपनिंग कलेक्शन—सब कुछ मायने रखता है। लेकिन सनी देओल इस भीड़ में अलग इसलिए खड़े हैं क्योंकि उनका स्टारडम ट्रेंड नहीं, परंपरा है। यही कारण है कि 68 साल की उम्र में भी वह ऐसे कलाकार बन गए हैं, जिनकी फिल्मों को लेकर ओपनिंग डे पर भरोसा किया जाता है।

अनुभव ही बना सबसे बड़ा हथियार

सनी देओल की ताकत आज उनकी उम्र नहीं, बल्कि उनका अनुभव है।
उन्होंने सिनेमा के कई दौर देखे हैं—
सिंगल स्क्रीन का स्वर्ण युग
मल्टीप्लेक्स का उदय भी।

इस अनुभव ने उन्हें यह समझ दी कि दर्शक क्या चाहता है और कब चाहता है। बहुत से कलाकार वापसी करते हैं, लेकिन कम ही लोग सही वक्त पर सही वापसी कर पाते हैं। सनी देओल ने वही किया। उन्होंने खुद को जबरदस्ती हर फिल्म में नहीं झोंका, बल्कि इंतजार किया—और जब लौटे, तो पूरे आत्मविश्वास के साथ।

68 साल की उम्र में सनी देओल का सुपरस्टार बनना यह साबित करता है कि—स्टारडम उम्र से नहीं, भरोसे से चलता है।जब तक दर्शकों के दिल में जगह बनी रहे, तब तक उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है।सनी देओल आज उसी भरोसे का नाम हैं—जो पुरानी यादों और नए जोश, दोनों को एक साथ जिंदा रखता है।यही वजह है कि 68 की उम्र में भी सनी देओल को देखकर यही कहा जा रहा है—“ये ढाई किलो का हाथ अभी भारी है।”

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