बिना नामांकन के सर्वेयर बनकर अवैध वसूली, शासन स्तर तक पहुंचा मामला
फर्रुखाबाद: प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) (शहरी) 2.0 के क्रियान्वयन को लेकर जनपद फर्रुखाबाद में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। योजना में अभी तक किसी भी कार्यदायी संस्था का औपचारिक नामांकन न होने के बावजूद, कुछ लोग स्वयं को सर्वेयर बताकर लाभार्थियों से अवैध धन उगाही कर रहे हैं। मामले के उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए विधायक गोपामऊ, हरदोई श्याम प्रकाश ने शासन स्तर पर पत्राचार करते हुए कार्रवाई की मांग की है। विधायक द्वारा दिनांक 22 जनवरी को निदेशक, राज्य शहरी विकास अभिकरण (डूडा), लखनऊ को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत अभी तक किसी भी कार्यदायी संस्था को नामित नहीं किया गया है। इसके बावजूद पुरानी कार्यदायी संस्था से जुड़े कुछ लोग जनता से अवैध रूप से धन की मांग कर रहे हैं।
विधायक ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। परियोजना अधिकारी, जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा), फर्रुखाबाद को भेजे गए पत्र में संस्था स्नो फाउंडेशन कंसल्टेंट्स के महाप्रबंधक ने स्थिति स्पष्ट की है। पत्र के अनुसार—
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत जनपद में 97.68 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। कुल शेष 273 आवासों में से मात्र 40 आवासों पर ही कार्य प्रगति पर है।
दिसंबर माह में केवल 10 आवासों का ही कम्पलीट जियोटैग किया गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शेष कार्य पूर्ण कराने के लिए संस्था द्वारा केवल—
जिला समन्वयक: प्रांशू प्रताप सिंह
सर्वेयर: मनीष यादव
को ही अधिकृत किया गया है।
संस्था द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसके अतिरिक्त सभी सर्वेयर एवं एमआईएस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है। एमआईएस से संबंधित समस्त कार्य अब संस्था के मुख्यालय द्वारा संपादित किया जा रहा है। इसके बावजूद आरोप है कि पूर्व में कार्यरत राहुल राजपूत, अमरनाथ, अंबुज यादव और सत्यम शुक्ला जैसे लोग अब भी स्वयं को सर्वेयर बताकर लाभार्थियों से धन की अवैध वसूली कर रहे हैं।
पूरा मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। वहीं विधायक द्वारा सीधे डूडा निदेशक को पत्र भेजे जाने से यह मामला शासन स्तर तक पहुंच गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस प्रकरण की औपचारिक जांच बैठाई जा सकती है और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार लाभार्थियों से अपील की जा रही है कि वे किसी भी व्यक्ति को सर्वे या आवास दिलाने के नाम पर पैसा न दें, और यदि कोई अवैध वसूली करता है तो उसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग या प्रशासन को दें। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) जैसी जनकल्याणकारी योजना में फर्जी सर्वेयरों द्वारा अवैध वसूली का यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि लाभार्थियों के साथ धोखाधड़ी का भी गंभीर उदाहरण है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और प्रशासन इस पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।


