प्राइवेट अस्पताल संचालक कर रहे अपनी जेब में गम
फर्रुखाबाद: डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय (Lohia Hospital) के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) वार्ड में विवाद होना अब आम बात बनती जा रही है। कभी अवैध वसूली तो कभी तीमारदारों से अभद्रता और मारपीट—लगातार सामने आ रही घटनाएं अस्पताल की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। लेकिन मामला यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अस्पताल गेट के बाहर बने बच्चों के प्राइवेट अस्पतालों तक जुड़ते नजर आ रहे हैं।
आरोप है कि लोहिया अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर संचालित निजी बच्चों के अस्पतालों में बीमार बच्चों के परिजनों को बरगलाकर भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह के जरिए किया जा रहा है, जिसमें दलालों के साथ-साथ अस्पताल के कुछ कर्मचारी और यहां तक कि बच्चों के चिकित्सक भी शामिल हैं। बीमार बच्चों के परिजनों को यह कहकर डराया जाता है कि लोहिया अस्पताल में बच्चों का सही इलाज नहीं हो पा रहा है, और यदि बच्चे की जान बचानी है तो तुरंत प्राइवेट अस्पताल ले जाना जरूरी है।
सूत्रों के अनुसार, बच्चों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कराने के बदले भेजने वाले व्यक्ति को खासा कमीशन दिया जाता है। इस अवैध गठजोड़ का सीधा फायदा निजी चिकित्सालयों के संचालकों को हो रहा है, जो मजबूर और डरे हुए परिजनों से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। सरकारी अस्पताल में जहां इलाज निःशुल्क होना चाहिए, वहीं निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च गरीब परिवारों की कमर तोड़ रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोहिया अस्पताल में तैनात कुछ बच्चों के डॉक्टर स्वयं अस्पताल के बाहर बने प्राइवेट अस्पतालों में भी बच्चों का इलाज करने जाते हैं। इससे हितों के टकराव (कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का गंभीर मामला सामने आता है। सवाल उठता है कि जब वही डॉक्टर निजी अस्पतालों में इलाज कर रहे हैं, तो सरकारी अस्पताल में बच्चों को समुचित इलाज क्यों नहीं मिल पा रहा?
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग इन गतिविधियों से अनजान बना हुआ है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है। यदि समय रहते इस नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाई गई, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पूरी तरह से खत्म हो सकती है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड और उसके आसपास संचालित प्राइवेट अस्पतालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जिन कर्मचारियों और चिकित्सकों की इसमें संलिप्तता सामने आए, उनके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। नवजात और बीमार बच्चों के इलाज से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है, जिसमें किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।


