(समाचार। यूथ इंडिया) नई दिल्ली। भारत और वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर पर उछल रही हैं, जिससे आम खरीदार के लिए सोना पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है। आइए इस तेजी के कारणों को आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के साथ विस्तार से समझते हैं, 2026 में सोने के भाव ने वैश्विक स्तर पर करीब $5,200-$5,400 प्रति औंस तक की छलांग लगाई है, जो इतिहास में सबसे ऊँचे स्तरों में से एक है। भारत में 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के लिए लगभग 1,65,000 के ऊपर और चाँदी 4,00,000 प्रति किलोग्राम के पार पहुँच चुकी है। पिछले कुछ सप्ताह में चाँदी ने भी समय-समय पर 65,000 से अधिक का उछाल देखा है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि सोना और चाँदी दोनों ही घरेलू स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, जिससे खरीदारी पर सीधा असर पड़ा है। सोना महँगा होने के मुख्य कारण हैं जैसे निश्चिंतता बढ़ती है—जैसे मुद्रास्फीति, गिरते स्टॉक मार्केट, या मंदी का डर—निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में चुनते हैं।यह सोने की मांग को बढ़ाता है, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं। सोने को सिर्फ व्यक्तिगत निवेश नहीं माना जाता केंद्रीय बैंक भी इसे अपनी भंडार नीति में जोड़ते हैं। जब केंद्रीय बैंक खरीद बढ़ाते हैं, तो वैश्विक सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाते हैं। सोना अंतरराष्ट्रीय रूप से डॉलर में मूल्यांकित होता है। जब डॉलर कमजोर होता है — जैसा 2026 में देखा गया — तो सोने की कीमतें और ऊपर चली जाती हैं। भारत अपना लगभग पूरा सोना आयात करता है। 2025 में सोना आयात लगभग $58.9 बिलियन तक पहुँच गया, जिससे विदेशी मुद्रा का दबाव बढ़ा और रुपये के मुकाबले सोना महँगा हुआ। बेचने वाले और खऱीदने वाले दोनों ही अब सुरक्षित निवेश की ओर झुक रहे हैं—सोड गोल्ड बॉन्ड्स, गोल्ड ईटीएफ जैसी वित्तीय पूँजीकरण वाले उत्पादों की मांग बढ़ी है।जब निवेश के रूप में सोना चुना जाता है, तो उसकी कीमतों में तेजी बढ़ती है। शादी-विवाह जैसी पारंपरिक खरीदारी में गिरावट, छोटे निवेशक सोना खरीदने से हिचकिचा रहे हैं, गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों में निवेश बढ़ा है, पिछले कुछ महीनों में सोना की बिक्री में लगभग 70त्न तक कमी आई है क्योंकि खरीदार इसके महँगे होने के कारण पीछे हट रहे हैं। सोना महँगा होना केवल भारत का नहीं, वैश्विक बाजार का रुझान है। जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता, राजनीतिक तनाव, और निवेशकों का सुरक्षित साधनों में विश्वास बढ़ता है, तो सोना स्वाभाविक रूप से मूल्य में बढ़ता है। इस साल की तेजी बताती है कि सोना अब सिर्फ आभूषण नहीं रहा—यह एक निवेश उपकरण बन गया है, जिसके भाव भावुक नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों से तय होते हैं।





